एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी वस्तु में किया तो हमको फल मिलेगा नरक। अगर राजसी व्यक्ति या राजसी वस्तु में मन का लगाव किया तो फल मिलेगा मृत्युलोक। अगर सात्त्विक पर्सनैलिटी देवता आदि प्लस सात्त्विक वस्तुओं में मन का अटैचमेन्ट किया तो फल मिलेगा स्वर्ग और जब गुणातीत महापुरुष या भगवान् से प्यार किया, उनमें मन का लगाव किया तो भगवान् का सब मालटाल मिलेगा। बड़ी सीधी-सी बात है। गधे की अकल से समझ सकता है कोई। हमको क्या चाहिये ? ये हम तय कर लें, बस उसी से प्यार कर लें, छुट्टी। कोई तमाम नॉलेज की आवश्यकता नहीं है। संसार में देखो, बाजार में आप जाते हैं, खरीदने। तमाम सामान बिक रहा है, आपको क्या चाहिये ? एक ने कहा- हमको तरकारी, एक ने कहा- हमको कपड़ा, एक ने कहा- हमको जूता, एक ने कहा- हमको रसगुल्ला। ठीक है, जाइये आप लोग। अब जिसकी जहाँ जो दुकान मिली अपनी- अपनी, वहाँ वो खड़ा हो गया और उसने खरीदा और चला आया। अब बाजार लगा है, लगा रहे, हमसे क्या मतलब? हमको जो लेना है, अपनी जो पसन्द है, जो अपना aim है, उद्देश्य है उसके अनुसार हम उस दुकान पर गये और ले आये। वैसे ही हमको जो कुछ प्राप्तव्य हो, बस उसी पर्सनैलिटी में मन का अटैचमेन्ट करना है।
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज
