This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, June 25, 2016
Tuesday, June 7, 2016
हरि
गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हो और निष्काम हो। उनकी इच्छा में इच्छा रखना
,उनको सुख देना, तन मन धन से सेवा करना,अपना सर्वस्व मानना,निरंतर
मानना,यही प्रेम है,शरणागति है। जिसने ये शर्तें पूरी कर दीं वो कृतार्थ हो
गया। जिसने नहीं पूरी कीं वो चौरासी लाख योनियों में जैसे कोल्हू का बैल
होता है ऐसे घूम रहा है बेचारा ।
..........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाप्रभु।
..........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाप्रभु।
शास्त्रीय
सिद्धांतों को प्रवचन, साहित्य, टी. वी. के माध्यम से एवं प्रचारकों को
शिक्षित करके देश-विदेश में भेजकर उनके द्वारा जनसाधारण तक पहुँचाकर,
सम्पूर्ण विश्व का महान् उपकार करने वाले करुणावतार श्री कृपालु गुरुदेव के
कोमल चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम...!!!
ब्रजधाम के एक साधु श्री का श्री महाराजजी के लिए उदगार...!!!
"कृपालु जी महाराज तो साक्षात् राधारानी हैं, वे तो अवढरदानी हैं। उन जैसा अवढरदानी, महान् दाता पृथ्वी पर दूसरा कोई नहीं हो सकता। उन्होंने तो सदा से लुटाया ही लुटाया है, लूटने वालों ने खूब लूटा और न लूटने वालों ने कुछ नहीं लूटा, वे चूक गये..... !"
ब्रजधाम के एक साधु श्री का श्री महाराजजी के लिए उदगार...!!!
"कृपालु जी महाराज तो साक्षात् राधारानी हैं, वे तो अवढरदानी हैं। उन जैसा अवढरदानी, महान् दाता पृथ्वी पर दूसरा कोई नहीं हो सकता। उन्होंने तो सदा से लुटाया ही लुटाया है, लूटने वालों ने खूब लूटा और न लूटने वालों ने कुछ नहीं लूटा, वे चूक गये..... !"
"छोटी काशी, जयपुर (गुलाबी नगरी) ,राजस्थान" में त्रि-दिवसीय भक्तियोग साधना शिविर का आयोजन।
इस युग के परमाचार्य पंचम मूल जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की असीम अनुकम्पा से उनकी प्रचारिका सुश्री श्रीधरी जी द्वारा 'जगद्गुरु कृपालु परिषत' की तीनों अध्यक्षाओं परमपूज्या सुश्री डॉ.विशाखा त्रिपाठी(बड़ी दीदी),सुश्री डॉ.श्यामा त्रिपाठी(मझली दीदी),सुश्री डॉ.कृष्णा त्रिपाठी(छोटी दीदी) के पावन सानिध्य में गुलाबी नगरी ,जयपुर में तीन दिवसीय भक्तियोग साधना शिविर का आयोजन।
दिनाँक: 1जुलाई से 3 जुलाई,2016.
इस युग के परमाचार्य पंचम मूल जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की असीम अनुकम्पा से उनकी प्रचारिका सुश्री श्रीधरी जी द्वारा 'जगद्गुरु कृपालु परिषत' की तीनों अध्यक्षाओं परमपूज्या सुश्री डॉ.विशाखा त्रिपाठी(बड़ी दीदी),सुश्री डॉ.श्यामा त्रिपाठी(मझली दीदी),सुश्री डॉ.कृष्णा त्रिपाठी(छोटी दीदी) के पावन सानिध्य में गुलाबी नगरी ,जयपुर में तीन दिवसीय भक्तियोग साधना शिविर का आयोजन।
दिनाँक: 1जुलाई से 3 जुलाई,2016.
नोट: इस साधना शिविर में रजिस्ट्रेशन हेतु कृपया
'sharadgupta40@yahoo.com' पर ई-मेल करें या अन्य जानकारी हेतु मेरे inbox
में भी सम्पर्क कर सकते हैं। शिविर में भाग लेने हेतु रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
है। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 15 जून 2016 है।
रक्षिष्यतीति
विश्वास:- ये विश्वास रखो कि हरि-गुरु हमारी रक्षा करेंगे। हम चलें निर्भय
होकर चलें ईश्वर की ओर ,वे योगक्षेम वहन करेंगे उनका कानून है। अकाट्य
कानून है। करेंगे कि नहीं करेंगे,करेंगे कि नहीं करेंगे मुँह से पूछें या
लिखकर पूछें। अरे लिखना पढ़ना पूछना कुछ नहीं है। वो कानून है वो तो करना ही
पड़ेगा उनकी ड्यूटि है और रक्षा कर रहे हैं ये भी realize करना है।
--------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
--------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
श्री महाराजजी के श्रीमुख से:
एक बात है बड़ी इंपोर्टेंट(IMPORTANT)। हरि- गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट। अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।
एक बात है बड़ी इंपोर्टेंट(IMPORTANT)। हरि- गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट। अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...

























