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Sunday, February 23, 2025

गुरु कृपा

अनहोनी होनी नहीं, तू क्यों हुआ उदास ।

होनी भी टल जायेगी, रख गुरु में विश्वास ।।


जितने आये कष्ट सब, कर लेना मंजूर।

लेकिन गुरु के द्वार से, कभी न होना दूर ।।


अपने गुरु को छोड़कर, करे किसी की आस ।

निश्चित ही वह शिष्य फिर, करे नरक में वास ।।


बिना गुरु के तर सका, हुआ न कोई शूर।

फैल रहा चारों तरफ, मेरे 'कृपालु' सदगुरु का नूर ।।


गुरु चरणों में शिष्य के, दुःख कट जाते आप ।

पास न उसके आ सके, जग के तीनों ताप ।।


अपने गुरु से प्रीत जो, करता है निष्काम।

गुरु चरणों में ही बसे, उसके चारों धाम ।।


जितने भी तू कष्ट दे, सब मुझको स्वीकार।

लेकिन गुरु-सेवा विमुख, मत करना करतार ।।


कठिन परीक्षा में भी कभी, मत छोड़ो विश्वास।

खोट काटने शिष्य का, देते हैं सतगुरु त्रास ।।


!!!श्री सदगुरुदेव भगवान की जय !!!


।।जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज की जय।।


मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...