Monday, August 27, 2012

भगवान की सेवा से भगवान की कृपा मिलेगी, उनका प्यार मिलेगा, अंत:करण शुद्ध होगा और वो तुम्हारा योगक्षेम वहन करेंगे।
------श्री महाराजजी।



परिपूर्ण तो कोई है नहीं,कमी सबमे है, लेकिन उस कमी को भी कोई सुनना नहीं चाहता।
------श्री कृपालु महाप्रभु।






वे सदा से हम पर निगरानी रखते हैं। हमारे हर संकल्प, हर क्रिया को, हर क्षण ,हमारे साथ रहकर देखा करते हैं। यह हमारी ही कमी है की हम उन्हे अपने साथ सदा महसूस नहीं कर पाते। बस पूर्ण दीन अतिदीन होकर अपनी इंद्रिय मन बुद्धि को उनके चरणों में सदा-सदा के लिए अर्पित कर दो। केवल उनकी आज्ञा ही हमारा चिंतन और उसका पालन ही हमारा काम है। बस इतनी साधना है। इसी बात पर आँसू बहाकर उनके चरणों को धोकर पी लो कि हम उन्हे सदा साथ-साथ महसूस क्यो नहीं करते।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

JAIPUR PUBLIC SPEECH BY SHRI MAHARAJJI VIDEO 2007.





मन का नित्य संग गोविंद राधे।
हरि गुरु दोनों में ही रहे बता दे।।

गुरु हरि का ही रूप गोविंद राधे।
जानो अरु मानो अरु औरों को जना दे।।

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित दिव्य ग्रंथ 'राधागोविंदगीत' से उद्धृत।



When GOD solves your problems, You have faith in HIS abilities;
When GOD doesn't solve your problems HE has faith in your abilities.

मन एक है या तो वह संसार को दे दो,या हरि-गुरु को...........


"If someone continuously has association of a true Saint, continuously listens to Him, understands Him, then in a few days faith will arise on its own. And if there is faith, love will automatically come. If there is loving devotion – he would get real devotion and then finally fulfill his ultimate aim".
- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.

LISTEN TO THESE DIVINE LECTURES.THESE ARE NOT ORDINARY LECTURES,IF YOU WILL LISTEN THEM REGULARLY,YOU WILL SURELY FEEL,WHAT I MEAN! ALL OF YOUR SPIRITUAL DOUBTS,DISBELEIFS WILL BE CLEARED.AFTER ALL YOU WILL BE LISTENING TO 5TH ORIGINAL JAGADGURU.......THE SUPREME ACHARYA OF THIS AGE.......JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.FEEL THE DIFFRENCE...........RADHEY-RADHEY.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...