Monday, September 3, 2012





"Radha and Krishn love you more than you imagine".
----Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.



विश्व शान्ति................

यदि विश्व के सभी मनुष्य श्रीकृष्ण भक्ति रूपी शस्त्र को स्वीकार करले, तो समस्त देशों का,समस्त प्रांतों का,समस्त नगरों का,समस्त परिवारों का झगड़ा ही समाप्त हो जाये।केवल येहि मान ले की सभी जीव, श्रीकृष्ण के पुत्र हैं।अत: परस्पर भाईभाई हैं।पुनः सभी जीवों के अंत:करण में श्रीकृष्ण बैठे हैं।
अतएव किसी के प्रति भी हेय बुद्धि,निंदनीय है।वर्तमान विश्व में इस सिद्धान्त पर किसी भी राजनीतिज्ञों का ध्यान नहीं जाता अतएव अन्य भौतिक उपायों से शांति के स्थान पर क्रांति उत्तरोतर भढती जा रही है। केवल उपर्युक्त भावों के भरने से ही विश्वशान्ति संभव है।-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.



विश्व में चेतन अथवा अचेतन सभी प्राणियों में श्री कृष्ण को देखना ही सिद्धि है.


विश्व शांति के हेतु विश्वबंधुत्व ही आज की प्रमुख मांग है।वह केवल हिन्दू वैदिक फिलोसोफी से ही हो सकता है। 'य आत्मनि तिष्ठती' इस वैदिक सिद्धान्त के अनुसार सभी जीवों में भगवान का निवास है।यदि यह बात मानवमात्र स्वीकार करले, तो समस्त झगड़े समाप्त हो जाये और विश्वशांति का मार्ग प्रशस्त हो जाये।
------जगद्गुरुत्तम प्रभु श्रीकृपालुजी महाराज।


We may say, "O Lord, I offer you this...and this...and this..." But when we say, "I offer you my will," we have nothing else to offer.



यदि भगवान् को सर्वान्तर्यामी सर्वज्ञ समझकर यह सब उन्ही पर छोड़ दिया जाय, तो माँगने की बीमारी ही उत्पन्न न होगी |

 If you truly believe that God is Omniscient and knows better than you what you need, then why do you ask Him for anything?

~ Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj.


हमसे तो कुछ होता नहीं। यह जो बैठे-बैठे निराशा का चिन्तन करते हो, यही सर्वनाश करता है। निराशा गुरु की शक्ति का अपमान है। निराशा तब होती है जब शरणागत यह सोचता है कि हमारा गुरु हमारी रक्षा नहीं कर रहा है न भविष्य में करेगा। वह रक्षा करने में असमर्थ है। स्वयं से पूछो क्या ऐसा है?

सद्गुरु के पास किसी को इंकार नहीं है। जो डूबने को राजी है सद्गुरु उसे लेने को तैयार है। वह शर्ते नहीं रखता। वह पात्रताओं के जाल खडे नहीं करता। अपात्र को पात्र बना ले, वही तो सद्गुरु है। अयोग्य को योग्य बना ले वही तो सद्गुरु है। संसारी को सन्यासी बना ले, वही तो सद्गुरु है।

- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...