Tuesday, September 11, 2012


क्षण क्षण हरि गुरु स्मरण में ही व्यतीत करो. पल पल मृत्यु की और बढ़ रहे हो और संसार में बेहोश हो.
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।"

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स्वयं से पूछो 'तुमने कितने घंटे साधना करने में लगाये? B.a ,M.a,M.ed करने में तो 10 गुणा समय दिया-पेट के लिए। ईश्वरीय काम के लिए कितने घंटे दिये?' और चाहते हो पूरा लाभ मिल जाये। कोई नगर तुम्हारे घर से 100 मील दूर है, तो दस मील चलने के बाद तुम खड़े क्यों हो गए? अरे और आगे चलो, नगर मिलेगा। रोड ठीक है, माइलस्टोन भी मिल रहें हैं। लेकिन अगर आपको रोड़ पर डाउट हो गया ,तो 10 मील जाकर लौट आए। फिर 10 मील दक्षि...
...ण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो। वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ। पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?

--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी भगवान।
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Sunday, September 9, 2012


It is Thakurji's (Shree Krishna's) weakness that the moment He hears someone singing Kishoriji's (Radharani's) name, He runs towards the one singing Her names! To please and make Shree Krishna happy, just chant the Divine name and glories of Radharani. This is the fastest method of pleasing your beloved Shree Krishna.



Even if you chant 'Ram Ram' or 'Shyam Shyam' for endless lives, day and night but have attachment to worldly objects, then after death you will get the fruit of the object you are attached to and not the Name you have been chanting.



Your Shyamsundar is always yours, so why do you feel sad? Have this firm faith that He will love you as much as you love Him. That is His promise.



"वे हमारी रक्षा करते हैं, वे हमारी रक्षा कर रहें हैं, वे आगे भी हमारी रक्षा करेंगे इस पर विश्वास कर लो।
----श्री महाराजजी।"




"वे सदैव हमारी रक्षा करते रहे हैं, वर्तमान में भी कर रहे हैं। हम नहीं जानते हम किस खतरे में पड़ जाते अब तक?
-----श्री महाराजजी।




"तत्वज्ञान व्यक्ति के दिमाग से गया कि गलती हुई.............
-------श्री महाराजजी."


"कभी यह ना सोचो कि कृपा की कमी है। कमी जो है वह हममे ही है। महापुरुष शरणागत के लिये क्या-क्या भगीरथ प्रयत्न करता है, यह तो भगवतप्राप्ति होने पर ही साधक को समझ में आ सकता है। सब लोग कमरा बंद करके सोचे तो पायेंगे कि मेरा कितना कायापलट हो गया? में कहाँ जा रहा था,कहाँ लाकर खड़ा कर दिया महाराजजी ने?"

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...