Tuesday, September 11, 2012


प्रश्न -भगवान् का प्रेम कैसे मिलेगा ?

उतर -किसी भी उपाय से भगवान् का प्रेम नहीं हो सकता ! अनन्त कोटि साधना कर डालो -योग , यज्ञ ,जप ,तप पूजा लेकिन प्रेम नहीं मिलेगा !
हरि-गुरु कृपा से ही प्रेम मिलता है ! किसी साधना से नहीं ! भगवान् के पस अनन्त शक्तियाँ हैं ! उनमें प्रेम शक्ति सर्वोपरि है !
वह अन्य सारी शक्तियाँ शक्तिमान के आधीन रहती हैं किन्तु प्रेमा शक्ति ऐसी शक्ति है जिसके आधीन भगवान् रहते हैं !

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज .
किशोरी मोरी, करहु कृपा की कोर |
बहुविधि नाच नचावति स्वामिनि !, यह माया बरजोर |
काम क्रोध अरु लोभ मोह मद, घेरे चहुँ दिशि चोर |
जानतहूँ नहिं मानत ठानत, हठहिँ हठी मन मोर |
सुत वित नारि पियारि लगति अति, यदपि कहावत तोर |
...



ताते दै निज प्रेम ‘ कृपालुहिं ’, हेरहु हमरिहुँ ओर ||


भावार्थ - हे किशोरी जी ! मुझ पर कृपा दृष्टि करो | यह प्रबल माया मुझे अनेक प्रकार के नाच नचा रही है | काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह ये बड़े-बड़े शत्रु चारों ओर से घेरे हुए हैं | सब कुछ जानते हुए भी यह हठीला मन दुराग्रह के कारण नहीं मानता, संसार की ओर ही जाता है | यधपि मैं तुम्हारा कहलाता हूँ फिर भी धन, पुत्र, स्त्री आदि से प्यार करता हूँ | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं इसलिए एक बार हमारी ओर भी देखकर, अपना विशुद्ध प्रेम देकर कृतार्थ करो |


(प्रेम रस मदिरा दैन्य-माधुरी)
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित- राधा गोविन्द समिति.

It is God's promise that He will accept and love the individual soul in the same manner that the individual soul loves Him."

श्री कृपालु जी महाराज के मुखारविंद से:-

जो आदेश मैंने तुमको दिया है: दीनता, मधुरभाषण, नम्रता , उनका पालन तुम लोग अभी नहीं कर रहे हो। एक भिक्षा माँग रहा हूँ, तुम लोग लापरवाही कर रहे हो, यह बुरी बात है।


जीवन वही है जो हरि-गुरु सेवा में ही लगा रहे।
-----श्री महाराजजी।"



जिन्दगी उसी की महान है, जो हरि-गुरु के सुख में बीतती रहे।
------श्री महाराजजी।"

क्षण क्षण हरि गुरु स्मरण में ही व्यतीत करो. पल पल मृत्यु की और बढ़ रहे हो और संसार में बेहोश हो.
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।"

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स्वयं से पूछो 'तुमने कितने घंटे साधना करने में लगाये? B.a ,M.a,M.ed करने में तो 10 गुणा समय दिया-पेट के लिए। ईश्वरीय काम के लिए कितने घंटे दिये?' और चाहते हो पूरा लाभ मिल जाये। कोई नगर तुम्हारे घर से 100 मील दूर है, तो दस मील चलने के बाद तुम खड़े क्यों हो गए? अरे और आगे चलो, नगर मिलेगा। रोड ठीक है, माइलस्टोन भी मिल रहें हैं। लेकिन अगर आपको रोड़ पर डाउट हो गया ,तो 10 मील जाकर लौट आए। फिर 10 मील दक्षि...
...ण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो। वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ। पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?

--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी भगवान।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...