Friday, September 14, 2012


महाराजजी मेरे जब पास खड़े, में आस करू किसकी किसकी.
जब महाराजजी मेरे दिलदार मिले,में खोज करू किसकी किसकी.
जब रूप अनूप छटा महाराजजी की ,छबि और लखू किसकी किसकी.
जब दासी हुयी शरणे महाराजजी की , फिर शरण गहुँ किसकी किसकी.
कालि से भजूँगा जनि गोविंद राधे ।
कहु जाने काल कब टिकट कटा दे ॥

''अरे मनुष्यों ! कल से भजूँगा, कल से भजूँगा मत कहो, मत सोचो । क्यों...? अरे वह जो तुम्हारी खोपड़ी पर सवार है काल, यमराज । क्या पता कल के पहले ही टिकट कट जाये रात ही को ।" ऐसे रोज उदाहरण हमारे विश्व मे हो रहे हैं, कि रात को एक आदमी सोया और सदा को सो गया । न दर्द हुआ, न चिल्लाया, न घर वालों को मालूम हुआ। घर वाले समझ रहे हैं सो रहा है,
आज बड़ी देर तक सोता रहा, अरे भई जगा दो । जगाने गये तो मालूम हुआ सदा को सो गया, इसका टिकट कट गया ।
...

इसलिये कल से भजूँगा यह मत कहो, मत सोचो, तुरंत करो उधार मत करो । उधार करने की आदत हमारी तमाम जन्मों से है और इसलिये हम अनादिकाल से अब तक चौरासी लाख में घूम रहें है एक कारण |अन्नत संत मिले समझाया हम समझे लेकिन उधार कर दिया । करेंगे... करेंगे । तन मन धन ये तीन का उपयोग करना था तीनों के लिये हमने उधार कर दिया । करेंगे, बुढ़ापे में कर लेंगे अभी इतनी जल्दी भी क्या है । मन तो और बिगड़ा हुआ है । धन से तो इतना प्यार है कि कोई भी परमार्थ काम में खर्च करने में भी बुद्धि लगाते हैं - ''करें, कि न करें? कर दो भगवान के निमित । अरे रहने दो... अरे नहीं कर दो, अरे नहीं क्यों निकालो जेब से, अरे चलो अब कर ही देते हैं । नहीं अब कल करेंगे,'' ये हम लोगों का हाल है सोचियेगा अकेले में । यही सब होता है । तो उधार करना बन्द करना है ।

---------जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज !!


स्वयं से पूछो 'तुमने कितने घंटे साधना करने में लगाये? B.a ,M.a,M.ed करने में तो 10 गुणा समय दिया-पेट के लिए। ईश्वरीय काम के लिए कितने घंटे दिये?' और चाहते हो पूरा लाभ मिल जाये। कोई नगर तुम्हारे घर से 100 मील दूर है, तो दस मील चलने के बाद तुम खड़े क्यों हो गए? अरे और आगे चलो, नगर मिलेगा। रोड ठीक है, माइलस्टोन भी मिल रहें हैं। लेकिन अगर आपको रोड़ पर डाउट हो गया ,तो 10 मील जाकर लौट आए। फिर 10 मील दक्षि
...ण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो। वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ। पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?

--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी भगवान।

हरि हरिजन के आचरन , मायामय मत जान !
उनके चरित अलौकिक ,माया क्रीड़ा मान !!
भावार्थ- श्रीकृष्ण एवं उनके भक्तों के आचरन को मायिक मत समझिये !
उनके आचरन माया के न होकर , योगमाया के होते हैं ! अतः दिव्य होते हैं !!
-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
प्रभु जी ! भले बुरे हम तेरे |
उदर भरे पर महा आलसी, सोवत साँझ सवेरे |
काम क्रोध अरु ममता तृष्णा, रहत सदा नित घेरे |
माया-वश सब जनम गमायो, भटक फिरे बहुतेरे |
तुम बिनु कौन सहायक मेरो, बैरी बहुत घनेरे |
...
दास ‘कृपालु’ आस तजि सब की, भये श्याम के चेरे ||


भावार्थ- हे श्यामसुन्दर ! हम अच्छे या बुरे जैसे भी हैं तुम्हारे हैं | पेट भरने पर अत्यन्त आलस्य से युक्त होकर सांयकाल से प्रात:काल तक सोते रहते हैं | हे नाथ ! काम, क्रोध, ममता, एवं लालच आदि ने मेरे ऊपर पूर्ण अधिकार जमा रखा है | आपकी माया के वशीभूत होकर सारा जीवन इधर-उधर भटक कर व्यर्थ ही गँवा दिया है | तुमको छोड़कर दूसरा कोई भी मेरी सहायता करने वाला नहीं है | सभी स्वजन बनकर शत्रु की भाँति स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं, सभी आशाओं को छोड़कर एवं सबसे सन्बन्ध तोड़ कर श्यामसुन्दर के दास हो गये हैं |


(प्रेम रस मदिरा दैन्य-माधुरी)
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित- राधा गोविन्द समिति.

Sewa means getting into the divine service of lord, and this is our only goal. But that would happen after Bhagwat prapti. What before that? Guru is the representative of Lord on earth, so do sewa unto him, do whatever pleases him, follow his sayings, do Roop Dhyan, shed tears for bhagwan, and if capable then do Daan. Making him happy, makes Shyama Shyam Happy automatically.... Radhey Radhey.

Tuesday, September 11, 2012



अपराध करने वाले का सबसे बड़ा अपराध है, भगवान या गुरु के प्रति ये सोचना कि उससे छिप कर मैं अपराध कर सकता हूँ। अगर किसी प्रकार से गुरु को पता भी पड़ गया तो फिर यह सोचना और भी अहितकर है कि किसी ने इनको बता दिया होगा।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।"

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...