This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Sunday, September 16, 2012
मेरे गुरुवर मेरे गिरिधर प्यारे, दोउ एकहि हो न सपनेहु न्यारे।
हरि की कृपा ते मिले गुरुवर प्यारे, गुरु की कृपा ते मिले गिरिधर प्यारे।
गिरिधर तो हैं प्राण हमारे, गुरुवर मेरे प्राण पियारे।
गुरुवर आत्मा गिरिधर प्यारे, गिरिधर आत्मा गुरुवर प्यारे।
गुरुवर कह भज गिरिधर प्यारे, गिरिधर कह भज गुरुवर प्यारे।
...
गुरुवर कह बड़ गिरिधर प्यारे, गिरिधर कह बड़ गुरुवर प्यारे।
निर्मल मन चह गिरिधर प्यारे, निर्मल मन कर गुरुवर प्यारे।
गुरुवर गिरिधर सँग भजु प्यारे, या गुरुवर को हि भज प्यारे।
मम गुरुवर मम गिरिधर प्यारे, तुम दोउ रहु नित हृदय हमारे।
निर्मल मन चह गिरिधर प्यारे, निर्मल मन कर गुरुवर प्यारे।
गुरुवर गिरिधर सँग भजु प्यारे, या गुरुवर को हि भज प्यारे।
मम गुरुवर मम गिरिधर प्यारे, तुम दोउ रहु नित हृदय हमारे।
Friday, September 14, 2012
Be a lover of God, not of the world. Do not beg your God and Master for health, wealth and material goods. When you bow to God but desire the world, you prove that you love not the Creator, but His creation. If you insist on asking God for something, ask the same thing as Prahlad: "God! Kindly destroy the very seed of desire that exists in my heart.
"Austerity, yog, or vigorous practice of meditation etc., are never required in order to receive Grace of Radha Krishn as They are causelessly merciful by nature. Just have unflinching faith in Them. That’s all you have to do. Your eternally ruined luck will be instantly transformed and you will become Theirs forever.
------shri maharajji."
"श्री महाराजजी के मुखारविंद से:
टाइम बरबाद न करो। जितना समय पेट भरने के लिए जरूरी है उतना समय संसार को दो,बाकी टाइम का उपयोग करो। भगवदविषय में लगाओगे तो बहुत जल्दी आगे बढ़ जाओगे अंत:करण की शुद्धि की और। और अगर मर गए बीच में तो जो साधना की है हमारी है वो तुमको फिर मनुष्य बना देगी और फिर कोई गुरु मिल जायेगा या तुम्हारा वही पुराना गुरु दूसरा रूप धारण करके आ जायेगा और तुमको फिर आगे बढ़ाएगा। अँधेर नहीं है भगवान के यहाँ कि बीच में छोड़ दिया गुरुजी ने। ऐसा नहीं होता। वो सदा के लिए हमारा साथ देता है भगवद प्राप्ति तक। इसलिए टाइम का उपयोग करो,समय नष्ट न करो, साधना करते रहो।"
"संसार के कार्य करते हुए भी बीच-बीच में बारंबार 'भगवान मेरे सामने हैं' इस प्रकार रूपध्यान द्वारा निश्चय करते रहना चाहिये। इससे दो लाभ हैं - एक तो रूपध्यान परिपक्व होगा, दूसरे हम, भगवान को अपने समक्ष, साक्षात रूप से महसूस करते हुए उच्छृंक्ल न हो सकेंगे, जिसके परिणाम स्वरूप अपराधों से बचे रहेंगे। जीव तो, किंचित भी स्वतंत्र हुआ कि बस, वह धारा-प्रवाह रूप से संसार की ही ओर भागने लगेगा।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।"
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...



















