Tuesday, January 8, 2013


कृपा करु बरसाने वारी,तेरी कृपा का भरोसा भारी।
कोउ हो या न हो अधिकारी, सब पर कृपा करें प्यारी।।
------श्री कृपालु महाप्रभु।

भगवान और गुरु सर्वव्यापक हैं, हमारे क्षण-क्षण के विचारों को, चिंतन को नोट करते हैं, ये विश्वास हमें सदा अपने हृदय में बनाये रखना चाहिये।
------श्री महाराजजी।

Shree Maharaj Ji says:

We wash our clothes with clean water to rid them of impurities. If we wash them with dirty water, they will only get worse. Similarly, we have to wash our hearts clean by inviting only pure personalities in. If we let the impure into our heart, it will only get worse.

चुम्बक का कमाल,शुद्ध लोहे पर होता है, मिलावट वाले पर नहीं हो सकता। जिस लोहे में 90 परसेंट मिलावट है, उसको चुंबक नहीं खींच सकता। वो तो केवल क्लीन(clean) लोहा हो उसी को खींचता है। तो भगवान का अवतार या संत महापुरुष उसी को जल्दी खींच सकते हैं ,जिसका अंत:करण जितना शुद्ध हो। पापात्मा नहीं खिंचता वो हँसता है। बाबाजी क्या बोल रहे थे? भगवान,इन लोगो को और कोई काम नहीं है।मज़ाक बनाते हैं,खिल्ली उड़ाते हैं।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।


Paani Mein Meen Pyaasi, Mohi Sun Sun Aave Haasi............

A fish is thirsty in water, when I listen to this I laugh. What an irony? God is sitting within us, He is imbibed in each and every particle and God Himself is bliss, yet we do not feel this bliss because we look for it in the world forgetting our Divine beloved.

When you start practicing 'remembrance' and 'chanting meditation' according to the instructions of Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj,your heart begins to open up and surge of divine love energy permeates your whole being,bringing contentment,confidence and security in your life.
RADHEY-RADHEY.

आँसू बहाने से अन्तःकरण शुद्ध होगा, याद कर लो सब लोग, रट लो ये कृपालु का वाक्य। भोले बालक बनकर रोकर पुकारो, राम दौड़े आयेंगे। सब ज्ञान फेंक दो, कूड़ा-कबाड़ा जो इकट्ठा किया है। अपने को अकिंचन, निर्बल, असहाय, दींन हीन, पापात्मा महसूस करो, भीतर से, तब आँसू की धार चलेगी, तब अन्तःकरण शुद्ध होगा, तब गुरु कृपा करेगा। गुरु की कृपा से राम के दर्शन होंगे, राम का प्यार मिलेगा और सदा के लिये आनन्दमय हो जाओगे.

-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...