Tuesday, January 8, 2013


आँसू बहाने से अन्तःकरण शुद्ध होगा, याद कर लो सब लोग, रट लो ये कृपालु का वाक्य। भोले बालक बनकर रोकर पुकारो, राम दौड़े आयेंगे। सब ज्ञान फेंक दो, कूड़ा-कबाड़ा जो इकट्ठा किया है। अपने को अकिंचन, निर्बल, असहाय, दींन हीन, पापात्मा महसूस करो, भीतर से, तब आँसू की धार चलेगी, तब अन्तःकरण शुद्ध होगा, तब गुरु कृपा करेगा। गुरु की कृपा से राम के दर्शन होंगे, राम का प्यार मिलेगा और सदा के लिये आनन्दमय हो जाओगे.

-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

Sunday, September 16, 2012




जरा सोचो! कितनी बड़ी शक्ति ने अपनाया है, और वे मेरे किसी गलत कार्य से दुखी हो रहें हैं, तो धिक्कार है।

"Material jealousy pulls down our consciousness. But if jealousy is spiritualized, it becomes constructive and inspires us to move ahead..............Radhey Radhey............"


"बाहँ छुड़ाये जात हो निबल जानि के मोहिं।
हृदय ते जब जाहुगे, मर्द बदौंगो तोहि।।"



"भक्ति रूपी महल दीनता पर ही खड़ा है। जिसे विशेष लाभ प्राप्त करना है उसे दीनता लानी होगी।
-------श्री महाराजजी।"


Only by the Grace of the 'true Guru' one can attain Divine knowledge. But one finds a 'genuine Guru' by 'God's grace'.


"तृष्णा की नदी गहरी है, शरीर रूपी नाव जीर्ण है, अतएव बिना कुशल नाविक सद्गुरु के तुम भवसागर से कैसे पार उतरोगे। सद्गुरु की शरण ही संसार -सागर से बचाने वाली है।"

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...