Friday, January 11, 2013




Only moments spent in the sweet remembrance of God are worthwhile.Otherwise, we are sinning at every other moment.

---jagadguru shri kripalu ji maharaj.

भगवान् , महापुरुष की कोई बात समझ में आ जाती है ,यह आश्चर्य है ! नहीं आती , यह तो स्वाभाविक है , क्योंकि आप मायिक हैं और महापुरुष अमायिक ! यदि तुम किसी महापुरुष को तभी मानो जब उसकी बांते तुम्हें समझ में आ जायें , तो शास्त्र कहते हैं इस पैमाने से तुम जहाँ हो , उससे और पीछे खिसकते जाओगे , क्योंकि ईश्वरीय जगत के बड़े सूक्ष्म और रहस्य के कानून हैं ! उन्हें केवल उनकी गवर्नमैंट ( government) वाले ही जानते हैं !

*********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ***********



रूपध्यान ही साधना है, उपासना है, भक्ति है।
-----श्री महाराजजी।


When you start practicing 'remembrance' and 'chanting meditation' according to the instructions of Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj,your heart begins to open up and surge of divine love energy permeates your whole being,bringing contentment,confidence and security in your life.
RADHEY-RADHEY.

"Service (seva) (physical or monetary) (tan se ya dhan se) is a token of your love and dedication at your master's feet which he accepts out of his kindness.If a rasik saint accepts your services,it is only his grace upon you.
------JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ."

Thursday, January 10, 2013




वास्तविक महापुरुष के सान्निध्य में संसार से सहज वैराग्य एवं भगवान में सहज अनुराग बढ्ने लगता है। तत्वज्ञान परिपक्व होने लगता है। जीव अवश्य महसूस करने लगता है कि वो कल्पना भी नहीं कर सकता था की भगवदविषय में कभी इतना मन लगने लगेगा, इतना समय वो दे पाएगा।



वेदव्यास कहते है कि जितनी आराधनाएँ हैं, उपासनाएँ हैं- तामसी, उससे ऊंची राजसी, उससे ऊंची सात्विकी देवताओं की भक्ति, उससे ऊंची ब्रह्म की भक्ति, उससे ऊंची परमात्मा की भक्ति ,परमात्मा की भक्ति से ऊंची भगवान की और उनके अवतारों की भक्ति, और सबसे ऊंची भक्ति श्री राधाकृष्ण की, लेकिन श्री राधाकृष्ण की भक्ति से भी ऊंची है-उनके भक्तों की भक्ति।
भगवान के भक्तों की भक्ति से भगवान जितनी शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं,अपनी भक्ति से नहीं।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...