Tuesday, January 15, 2013




सदा यही सोचो कि मेरे जीवन का एक क्षण भी बिना हरि-गुरु सेवा के नष्ट न होने पाये। अपने आपको अपने शरण्य की धरोहर मानकर उनकी नित्य सेवा करने में ही अपना भूरिभाग्य मानो।

------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।


हाथ पैर की सेवा करना कोई बहुत बड़ी सेवा नहीं है, संत जो कहता है उसके अनुसार चलना ,सबसे बड़ी सेवा है।
-------श्री महाराजजी।



मनुष्य का शरीर' 'श्रद्धा' और 'महापुरुष की प्राप्ति' इन तीन चीजों का मिलना अत्यंत दुर्लभ है।
'मनुष्य शरीर' और 'महापुरुष' मिल भी जाये तो तीसरी चीज 'श्रद्धा' मिलना अत्यधिक दुर्लभ है। अनादिकाल से इसी में गड़बड़ी हुई है। अनंत संत हमें मिलें लेकिन हमारी उनके प्रति श्रद्धा नहीं हुई इसलिए हमारा लक्ष्य हमें प्राप्त नहीं हुआ।
पहले श्रद्धा, उसके बाद साधु संग, फिर भक्ति करो - ये नियम है।

-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।


हमसे तो कुछ होता नहीं। यह जो बैठे-बैठे निराशा का चिन्तन करते हो, यही सर्वनाश करता है। निराशा गुरु की शक्ति का अपमान है। निराशा तब होती है जब शरणागत यह सोचता है कि हमारा गुरु हमारी रक्षा नहीं कर रहा है न भविष्य में करेगा। वह रक्षा करने में असमर्थ है। स्वयं से पूछो क्या ऐसा है?

Monday, January 14, 2013




♥ .. radhey ♥ .. radhey ♥ .. radhey ♥ .. radhey ♥

"हम प्रेम नगर की बंजारिन "...........

"हम प्रेम नगर की बंजारिन, जप-ताप और साधन क्या जाने,

हम श्याम के नाम की दीवानी, व्रत नेम के बंधन क्या जाने,

हम ब्रज की भोरी ग्वारनिया हम ज्ञान की उलझन क्या जाने,
 
ये प्रेम की बाते है उद्धो, कोई क्या समझे कोई क्या जाने,

मेरे और मोहन की बाते, या मैं जानू या वो जाने ”।।


♥ .. radhey ♥ .. radhey ♥ .. radhey ♥ .. radhey ♥



आया है जगद्गुरु दिन मन भाया, नव उल्लास चतुर्दिग छाया।
मन गर्वित हो कर हुलसाया, मम सद्गुरु सा न कोई जग जाया॥

चारु समन्वय सुनि सब दर्शन, स्तुति किय लिख दिव्य गुन।
जगद्गुरुत्तम दै पद अनुपम, अभिनन्दन करि भाग्य मनाया॥

The auspicious anniversary of conferring the exclusive title of Jagadguru has come again. All surroundings have become joyful in memory of that day. We are very proud of our extraordinary master, who is the most competent of all present on this earth.

The scholars heard outstanding reconciliation of all schools of philosophy by Shri Maharaj Ji. They admired Him in a poetic tribute, which narrated His divine qualities and attributes. They conferred upon Him the title of JAGADGURUTTAM (best of all Jagadgurus) and considered themselves most fortunate for having the opportunity to honor Him.
जो समझा दे श्रुति सार, उर भरा प्रेम रिझवार।

सोई है सद्गुरु सरकार, गुरु सोइ 'कृपालु' सरकार।।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...