Friday, January 18, 2013





सौंप दो इनके हाथों में डोरी, यह कृपालु हैं तंग दिल नहीं हैं |
Hand over the string of your life in His hands. After all, He is ‘Kripalu’ (merciful), not a miser.


Human birth is attained only as a result of many virtuous actions. And then, it is due to more virtuous actions that one attains the Guru. It is due to virtuous actions that one attains faith. True faith leads one to do true sadhana.
जग राग छूटे नहीं, कृपा करु राधे,
माया ने सताया अति, कृपा करु राधे |
O Radhey! Please destroy my worldly attachments by showering Your Divine grace upon me. Your Maya has troubled me extensively; please bless me with Your grace.
 

Thursday, January 17, 2013






कुछ समय का नियम बनाकर प्रतिदिन श्यामसुन्दर का स्मरण करते हुए रोकर उनके नाम, गुण, लीलादी का संकीर्तन एवं स्मरण करो एवं शेष समय में संसार का आवश्यक कार्य करते हुए बार बार यह महसूस करो के श्यामसुंदर और गुरु हमारे प्रत्येक कार्य को देख रहे है और उन्हें हम दिखा दिखाकर कार्य कर रहे है. इस प्रकार कर्म भी न्यायपूर्ण होगा एवं थकावट भी न होगी. एक बार करके देखिये।
........श्री कृपालुजी महाप्रभु।




The bliss of Divine love flows from Shri Radha-Krishna’s Lotus Feet. Immeasurable bliss of the impersonal aspect of God can be sacrificed on a single drop of Shri Radha and Krishna’s Divine bliss.




"ज़ीरो में गुणा करो चाहे ज़ीरो से, चाहे करोड़ से ,जवाब ज़ीरो ही आयेगा। ऐसे ही बिना मन के कोई भी इंद्रिय की कोई भी साधना लिखी नहीं जायेगी साधना मानी नहीं जायेगी। उसको एक्टिंग कहते हैं और भगवान से एक्टिंग करना, यह सबसे बुरी बात है। संसार में करो ठीक है। वह तो एक्टिंग की जगह है ही। वहाँ तो फ़ैक्ट करते हो और जहां फ़ैक्ट करना है वहाँ एक्टिंग करते हो ,लापरवाही करते हो,ये अच्छा नहीं है।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु."


O Lord, grant me this, that I may love you without the hope of reward - that I may love you unselfishly forever.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...