Wednesday, January 23, 2013

समस्त आध्यात्मिक शंकाओ का अकाट्य तर्कों द्वारा पूर्ण समाधान........

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के प्रवचन नित्य प्रतिदिन अवश्य सुने।

राधे-राधे।
Photo: समस्त आध्यात्मिक शंकाओ का अकाट्य तर्कों द्वारा पूर्ण समाधान........

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के प्रवचन नित्य प्रतिदिन अवश्य सुने।

राधे-राधे।


 
"Bhakti is the recognition of our sweet relationship with Krishn. It directly relates to God Krishn Who is beyond this world of maya."
 
"Radha Krishn are so kind and loving that They are waiting for you with Their open arms to embrace. Leaving all the worldly attachments just look at Them with full faith and confidence like a small child and They will become yours forever."
 

Tuesday, January 22, 2013

यमराज ताक लगाए बैठा है कि आपका टाइम पूरा हो गया और बिना permission के बिना बताये ले जायेगा। तो यमराज ले जाये चाहे गोलोकवाले ले जायें टाइम पर सभी को जाना पड़ेगा।
............श्री महाराजजी।
यमराज ताक लगाए बैठा है कि आपका टाइम पूरा हो गया और बिना permission के बिना बताये ले जायेगा। तो यमराज ले जाये चाहे गोलोकवाले ले जायें टाइम पर सभी को जाना पड़ेगा।
 ............श्री महाराजजी।

 
 

अमोलक रतन मिलत बिनु मोल |
प्रेम-रतन याचत ज्ञानीजन, सुन लो कानहिं खोल |
श्याम प्रेम बिनु ब्रह्म-समाधिहुँ, मनहुँ निंब रस घोल |
तेहि बिनु कर्म, योग सब छूछो, लेहु तराजुहिं तोल |
स्वर्ग कर्म ते, सिद्धि योग ते, प्रेम बोल हरि बोल |
...
रतन ‘कृपालु’ अमोलक पायो, हमहुँ बजावत ढोल ||


भावार्थ - अमूल्य रत्न बिना मूल्य के मिलता है, यह कैसी विलक्षण बात है | इस अमूल्य प्रेम-रत्न को परमहंस लोग भी चाहते हैं, कान खोलकर सुन लो | श्यामसुन्दर के प्रेम के बिना ब्रह्मज्ञानियों की निर्विकल्प समाधि भी नीम के रस के समान कड़वी है | प्रेम के बिना कर्म एवं योगादि सब थोथे हैं, क्योंकि कर्म से स्वर्ग मिलता है एवं योग से सिद्धि मिल सकती है किन्तु प्रेम तो ‘हरि बोल’ बोलने से ही प्राप्त हो सकता है | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं हमने तो यह अमूल्य निधि ढोल बजाकर प्राप्त कर ली |

( प्रेम रस मदिरा सिद्धान्त – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति.
अमोलक रतन मिलत बिनु मोल |
प्रेम-रतन याचत ज्ञानीजन, सुन लो कानहिं खोल |
श्याम प्रेम बिनु ब्रह्म-समाधिहुँ, मनहुँ निंब रस घोल |
तेहि बिनु कर्म, योग सब छूछो, लेहु तराजुहिं तोल |
स्वर्ग कर्म ते, सिद्धि योग ते, प्रेम बोल हरि बोल |
रतन ‘कृपालु’ अमोलक पायो, हमहुँ बजावत ढोल ||


भावार्थ - अमूल्य रत्न बिना मूल्य के मिलता है, यह कैसी विलक्षण बात है | इस अमूल्य प्रेम-रत्न को परमहंस लोग भी चाहते हैं, कान खोलकर सुन लो | श्यामसुन्दर के प्रेम के बिना ब्रह्मज्ञानियों की निर्विकल्प समाधि भी नीम के रस के समान कड़वी है | प्रेम के बिना कर्म एवं योगादि सब थोथे हैं, क्योंकि कर्म से स्वर्ग मिलता है एवं योग से सिद्धि मिल सकती है किन्तु प्रेम तो ‘हरि बोल’ बोलने से ही प्राप्त हो सकता है |  ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं हमने तो यह अमूल्य निधि ढोल बजाकर प्राप्त कर ली |


( प्रेम रस मदिरा   सिद्धान्त – माधुरी )
  जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

 

Devotion to Guru is absolutely essential along with devotion to God, because it is only through the grace of the Guru that one can attain one’s goal.
...........SHRI MAHARAJJI.
Devotion to Guru is absolutely essential along with devotion to God, because it is only through the grace of the Guru that one can attain one’s goal.
...........SHRI MAHARAJJI.




अगर कोई महापुरुष की कृपा को ' फील ' करना सीख जाये , तो बस उसे और साधना करने की आवश्कता नहीं है !जिसके पीछे -पीछे भगवान् चलता है , उसने हमें दर्शन दिये , बस यही सोच - सोचकर , बलिहार जाकर , हमें हर्ष में पागल जाना चाहिये ! एक ईश्वरीय अक्षर का भी ज्ञान गुरु करा दे और उसके बदले में सम्पूर्ण पृथ्वी भी अगर कोई दे दे , तो भी उसके ऋण से उऋण नहीं हो सकता !

**********जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु ***********

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...