Saturday, February 2, 2013

भगवान् केवल भाव नोट करते है , क्रिया नहीं !
******श्री महाराज जी ******
भगवान् केवल भाव नोट करते है , क्रिया नहीं !
******श्री महाराज  जी ******

 

एक दिन अगर निकल जाये ऐसा कि न किसी के प्रति द्वेष अंदर आने पावे , न किसी के प्रति राग आने पावे , समझो वो तुम्हारा जीवन का असली दिन है ! और आ जाये कभी अभ्यास के कारनतो फील ( feel ) करो ! फीलिंग ( feeling) से दोष कम होते हैं !

************जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*************
एक दिन अगर निकल जाये ऐसा कि न किसी के प्रति द्वेष अंदर आने पावे , न किसी के प्रति राग आने पावे , समझो वो तुम्हारा जीवन का असली दिन है ! और आ जाये कभी अभ्यास के कारनतो फील ( feel ) करो ! फीलिंग  (  feeling) से दोष कम होते हैं ! 

************जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*************

 

भगवान् योग माया के पर्दे में रहते हैं और जीव माया के पर्दे में , अतः भगवान् के साकार रूप में सामने खड़े होने पर हम उन्हें अपनी भावना के अनुसार ही देख पाते हैं !
*****जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*****
भगवान् योग माया के पर्दे में रहते हैं और जीव माया के पर्दे में , अतः भगवान् के साकार रूप में सामने खड़े होने पर हम उन्हें अपनी भावना के अनुसार ही देख पाते हैं !
*****जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*****

 




Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj says :-

From today, why not take up a challenge to please your loving Guru? The single means of pleasing Guru is that from this very moment we should take a vow that, "No matter how harshly, grueling and severely bitter language one may speak to me, I will not hold the slightest grudge against that person. I will always look to my own faults & earnestly try to rectify them".




हास परिहास में भी शास्त्रीय सिद्धांतो का निरूपण करके प्रत्येक जाति, प्रत्येक संप्रदाय, बाल,युवा,वृद्ध सभी आयु तथा शिक्षित-अशिक्षित, मुर्ख-विद्धान सभी को जिन्होंने प्रेम पाश में बांधकर विश्व बंधुत्व का क्रियात्मक रूप स्थापित किया है, ऐसे सहज सनेही सुधासिंधू श्री गुरुवर के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।
समस्त शास्त्रों वेदों के गूढ़तम सिद्धांतो को भी सरल सरस रूप में प्रस्तुत करके जनसाधारण के मस्तिष्क में बैठाना, जिनके व्यक्तित्व की विलक्षणता है, ऐसे ज्ञान के अगाध समुद्र, गुरुवर को कोटि कोटि प्रणाम।
समस्त शास्त्रों वेदों के गूढ़तम सिद्धांतो को भी सरल सरस रूप में प्रस्तुत करके जनसाधारण के मस्तिष्क में बैठाना, जिनके व्यक्तित्व की विलक्षणता है, ऐसे ज्ञान के अगाध समुद्र, गुरुवर को कोटि कोटि प्रणाम।


जो श्री राधाकृष्ण भक्ति के मूर्तिमान स्वरुप है, ऐसे रसिक शिरोमणि है की स्वयं तो ब्रजरस में डूबे ही रहते है साथ ही बरबस पतितो को भी यह रस प्रदान करते है. कोई अधिकारी हो या ना हो सब पर ही कृपा सिन्धु श्री कृपालु गुरुदेव कृपा की वर्षा करते है. ऐसे कृपासिंधु सदगुरुदेव के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।
जो श्री राधाकृष्ण भक्ति के मूर्तिमान स्वरुप है, ऐसे रसिक शिरोमणि है की स्वयं तो ब्रजरस में डूबे ही रहते है साथ ही बरबस पतितो को भी यह रस प्रदान करते है. कोई अधिकारी हो या ना हो सब पर ही कृपा सिन्धु श्री कृपालु गुरुदेव कृपा की वर्षा करते है. ऐसे कृपासिंधु सदगुरुदेव के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।

 
 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...