This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, February 4, 2013
श्री महाराजजी के श्रीमुख से:
एक बात बड़ी इंपोर्टेंट| हरि, गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट| अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।
एक बात बड़ी इंपोर्टेंट| हरि, गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट| अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।
पहले नदी पार हो जाओ ,तब नाव को चैलेंज करो। अगर 10 फीट भी अभी नदी पार करना शेष है ,जहाँ अगाध पानी है सिर के ऊपर और आपने कहा - अब क्या है, कूद पड़ो। न, न अभी ख़तरा है, संकट अभी टला नहीं है। नामापराध यानि संत के प्रति अपराध कर देने पर ,भावभक्ति पर जाकर (जब भगवतदर्शन होने वाला होता है) वह उच्च कोटि का साधक भी अभाव भक्ति यानि भक्ति में शून्यता को प्राप्त हो जाता है, साधारण जीव की क्या हैसियत?
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज.
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज.
विपरीत चिंतन होने लगे तो तुरंत लाइन काट दो, - "नहीं मैं ही गलत हूँ, वो सही है, उनसे गलत काम हो ही नहीं सकता।" जैसे खाना खाते समय यदि एक चीज भी गलत आई,थोड़ी सी प्रतिकूल चीज भी आई,मुख से बाहर निकाल दिया। ऐसे ही आत्मा के प्रतिकूल पदार्थ यानि प्रतिकूल चिंतन प्रारम्भ होते ही इलाज़ करो, अन्यथा द्रौपदी के चीर की भाँति बढ़ता ही जायेगा,फिर संभल नहीं पायेगा। भगवान कहते हैं ," समस्त शास्त्रों का समस्त ज्ञान समस्त जीव प्राप्त नहीं कर सकते हैं।" यदि वह केवल इतना याद रखे कि विरक्त होकर वास्तविक गुरु के शरणागत हों और प्रतिक्षण गुरु के अनुकूल ही चिंतन व संकल्प करें तो उनका काम बन जायेगा।
--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
Shyama Shyam nam rupa leela guna dhama,
Gao roke rupadhyana yukta athon yama.
Sing the glories of Shyama Shyam’s (Radha Krishna’s) divine names, forms, qualities pastimes and abodes. Shed tears of longing for Them with your mind absorbed in Their loving remembrance.
-------jagadguru shree kripalu ji maharaj.
Gao roke rupadhyana yukta athon yama.
Sing the glories of Shyama Shyam’s (Radha Krishna’s) divine names, forms, qualities pastimes and abodes. Shed tears of longing for Them with your mind absorbed in Their loving remembrance.
-------jagadguru shree kripalu ji maharaj.
Sunday, February 3, 2013
जगद्गुरु स्वामी श्री कृपालु जी महाराज समझाते हैं ..............
जिसने अनुकूल ही रहने का निश्चय कर लिया है । फिर उसका कोई क्या कर लेगा? रामानंद सरीखे संत ने कबीरदास से कह दिया कि हम तुमको चेला नहीं बनायेंगे. कबीरदास ने सोचा, बहुत भोले हैं
गुरूजी.. '''''कहीं गुरु चेला बनाया करता है ! गुरु चेला नहीं बनाता, चेला गुरु बनाया करता है..''''' मैं तुम्हारे अनुकूल चिंतन ही करूँगा तब तुम क्या करोगे? उसने वही किया और वह इतना बड़ा संत कबीरदास बन गया ।
जिसने अनुकूल ही रहने का निश्चय कर लिया है । फिर उसका कोई क्या कर लेगा? रामानंद सरीखे संत ने कबीरदास से कह दिया कि हम तुमको चेला नहीं बनायेंगे. कबीरदास ने सोचा, बहुत भोले हैं
गुरूजी.. '''''कहीं गुरु चेला बनाया करता है ! गुरु चेला नहीं बनाता, चेला गुरु बनाया करता है..''''' मैं तुम्हारे अनुकूल चिंतन ही करूँगा तब तुम क्या करोगे? उसने वही किया और वह इतना बड़ा संत कबीरदास बन गया ।
प्रथम श्रद्धा युक्त हो जा, शरण गुरु पद प्यारे |
गुरु की बुद्धि में जोड़ निज बुद्धि, है शरण यह प्यारे |
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...











