Tuesday, February 5, 2013

Shri Maharaj Ji says:

Time is valuable so it should not be wasted. The past is over and the future is uncertain. Only the present is in our hands. Use it for the attainment of Shree Krishna's love before it is too late.
Shri Maharaj Ji says:

 Time is valuable so it should not be wasted. The past is over and the future is uncertain. Only the present is in our hands. Use it for the attainment of Shree Krishna's love before it is too late.

 



श्याम की मंद मंद मुसकान |
बिसरत नाहिं सखी एकहुँ छिन, पीतांबर फहरान |
मटकनि - मुकुट लटनि की लटकनि, अटक्यो तन मन प्रान |
अति रस भरे नैन सों हेरत, टेरत मुरली - तान |
नित्य - विहार करत वृंदावन, मंजुल - कुंज लतान |
लखि ‘कृपालु’ छुटि जात समाधिन, शिव सनकादिक ध्यान ||

भावार्थ - अरी सखी ! श्यामसुन्दर की मन्द - मन्द मुस्कान एवं पीताम्बर की फहरान एक क्षण को भी नहीं भूलती | उनके मुकुट के झूमने एवं घुँघराले बालों के लटकने पर मेरा तन, मन, प्राण अटका हुआ है | वे अत्यन्त रसीली आँखों से देखते हुए मुरली की तान छेड़ते हैं | वे वृन्दावन की सुन्दर लता कुंजों में नित्य विहार करते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि उन्हें देख कर शिव सनकादिक परमहंसों का समाधिस्थ ध्यान भी छूट जाता है |

( प्रेम रस मदिरा श्रीकृष्ण – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति.
श्याम की मंद मंद मुसकान |
बिसरत नाहिं सखी एकहुँ छिन, पीतांबर फहरान |
मटकनि - मुकुट लटनि की लटकनि, अटक्यो तन मन प्रान |
अति रस भरे नैन सों हेरत, टेरत मुरली - तान |
नित्य - विहार करत वृंदावन, मंजुल - कुंज लतान |
लखि ‘कृपालु’ छुटि जात समाधिन, शिव सनकादिक ध्यान ||


भावार्थ  -  अरी सखी ! श्यामसुन्दर की मन्द - मन्द मुस्कान एवं पीताम्बर की फहरान एक क्षण को भी नहीं भूलती | उनके मुकुट के झूमने एवं घुँघराले बालों के लटकने पर मेरा तन, मन, प्राण अटका हुआ है | वे अत्यन्त रसीली आँखों से देखते हुए मुरली की तान छेड़ते हैं | वे वृन्दावन की सुन्दर लता कुंजों में नित्य विहार करते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि उन्हें देख कर शिव सनकादिक परमहंसों का समाधिस्थ ध्यान भी छूट जाता है |


( प्रेम रस मदिरा   श्रीकृष्ण  –  माधुरी )
  जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

 
 
 

Practicing devotion to God is very simple. Just direct all your worldly desires towards God.
......SHRI MAHARAJJI.
Practicing devotion to God is very simple. Just direct all your worldly desires towards God.
......SHRI MAHARAJJI.

 

God showers His grace only when your heart is completely purified, which is possible only by practicing devotion under the guidance of genuine Guru.
...........SHRI MAHARAJJI.
God showers His grace only when your heart is completely purified, which is possible only by practicing devotion under the guidance of genuine Guru.
...........SHRI MAHARAJJI.

 
O Govind Radhey! Don't give me the world or liberation or even Baikunth. Change my mind in such a way that I always wish for Your happiness!
.......SHRI MAHARAJJI.
O Govind Radhey! Don't give me the world or liberation or even Baikunth. Change my mind in such a way that I always wish for Your happiness!
.......SHRI MAHARAJJI.

 
 

Be assured that only God is your true supreme well-wisher.
.......SHRI MAHARAJJI.
Be assured that only God is your true supreme well-wisher.
.......SHRI MAHARAJJI.

 

संसार मिलने के पहले ,मिलने पर और मिलने के बाद ,तीनों अवस्थाओं में दुःख है . येबात अगर बुद्धि में बैठ जाये तब भगवान की भूख बढ़ेगी ।

******जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु।

संसार मिलने के पहले ,मिलने पर और मिलने के बाद ,तीनों अवस्थाओं में दुःख है . ये बात अगर बुद्धि में बैठ जाये तब भगवान की भूख बढ़ेगी ।
 
******जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...