Tuesday, February 5, 2013

सुख का अनुभव करते समय भी भगवान् को मत भूलो तथा दुःखकाल में भी उनकी कृपा का अनुभव करो।
........श्री महाराजजी।
सुख का अनुभव करते समय भी भगवान् को मत भूलो तथा दुःखकाल में भी उनकी कृपा का अनुभव करो।
........श्री महाराजजी।

 

    सत्संग हो या कुसंग, मनुष्य जैसा संग करता है वैसा बन जाता है।
    .........श्री महाराजजी।
    सत्संग हो या कुसंग, मनुष्य जैसा संग करता है वैसा बन जाता है।
 .........श्री महाराजजी।

     

    मन का ईश्वर में लगाव नित्य और निरंतर होना चाहिए।
    ......श्री महाराजजी।
    मन का ईश्वर में लगाव नित्य और निरंतर होना चाहिए।
......श्री महाराजजी।

     

    Think that your worshipped form of God and Guru are always and everywhere with you as your guardians and observers.
    .......SHRI MAHARAJJI.
    Think that your worshipped form of God and Guru are always and everywhere with you as your guardians and observers.
.......SHRI MAHARAJJI.

     
     

    सहनशीलता बढ़ाओ, नम्रता बढ़ाओ, दीनता बढ़ाओ।
    .....श्री महाराजजी।
    सहनशीलता बढ़ाओ, नम्रता बढ़ाओ, दीनता बढ़ाओ।
.....श्री महाराजजी।

     

    Govind Radhey! You reside in everyone's heart. Make this faith deep seated in my heart.
    .......SHRI MAHARAJJI.

    O Govind Radhey! You reside in everyone's heart. Make this faith deep seated in my heart.
.......SHRI MAHARAJJI.

     
     

    श्याम को है आँसू प्रिय, गोविन्द राधे,
    याते श्याम हित नित आँसू बहा दे.

    भक्तियुक्तचित्त द्वारा भगवन्नाम संकीर्तन करते हुये करुण क्रंदन करो. व्याकुलता बढाओ.व्याकुलता ही भक्ति का आधार है.

    ------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
    श्याम को है आँसू प्रिय, गोविन्द राधे,
याते श्याम हित नित आँसू बहा दे.

 भक्तियुक्तचित्त द्वारा भगवन्नाम संकीर्तन करते हुये करुण क्रंदन करो. व्याकुलता बढाओ.व्याकुलता ही भक्ति का आधार है.
 
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

     
     

    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...