Thursday, February 7, 2013

Preparatory devotion leads to perfect devotion through divine grace.
.......SHRI MAHARAJJI.
Preparatory devotion leads to perfect devotion through divine grace.
.......SHRI MAHARAJJI.

God is omnipresent and at the same time omniscient. He takes note of your every thought.
ईश्वर सर्वव्यापक है, साथ ही वह सर्वज्ञ और सर्वान्तर्यामी भी है। वह हमारे प्रत्येक संकल्प को नोट करता है।
-------Jagadguru shri kripalu ji maharaj.
God is omnipresent and at the same time omniscient. He takes note of your every thought.
ईश्वर सर्वव्यापक है, साथ ही वह सर्वज्ञ और सर्वान्तर्यामी भी है। वह हमारे प्रत्येक संकल्प को नोट करता है।
-------Jagadguru shri kripalu ji maharaj.




मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है ।
****जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.

 

Along with devotion to God, devotion towards the Guru is absolutely essential, because it is by the grace of the Guru that one attains God.
******Jagadguru shri kripalu ji maharaj******
Along with devotion to God, devotion towards the Guru is absolutely essential, because it is by the grace of the Guru that one attains God.
******Jagadguru shri kripalu ji maharaj******

 
 

Wednesday, February 6, 2013

‎'इस जन्म में न हो, अगले जन्म में भगवान को पाऊँगा' यह कैसी बात है? ऐसा ढीलाढाला सुस्त भाव नहीं रखना चाहिए। उनकी कृपा से उन्हें इसी जन्म में प्राप्त करूँगा - मन में इस तरह का जोर रखना चाहिए, विश्वास रखना चाहिए। इसके बिना नहीं होगा। ढीलाढाला भाव अच्छा नहीं। अपने में जोर लाकर, विश्वास के साथ कहो - 'उन्हें जरुर पाऊँगा, अभी इसी क्षण पाऊँगा!'
------------जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज।
'इस जन्म में न हो, अगले जन्म में भगवान को पाऊँगा' यह कैसी बात है? ऐसा ढीलाढाला सुस्त भाव नहीं रखना चाहिए। उनकी कृपा से उन्हें इसी जन्म में प्राप्त करूँगा - मन में इस तरह का जोर रखना चाहिए, विश्वास रखना चाहिए। इसके बिना नहीं होगा। ढीलाढाला भाव अच्छा नहीं। अपने में जोर लाकर, विश्वास के साथ कहो - 'उन्हें जरुर पाऊँगा, अभी इसी क्षण पाऊँगा!'
 ------------जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 
 

The only price for attaining the priceless divine Love for Shyama Shyam is shedding endless stream of longing tears. There is no other way to please them.
......SHRI MAHARAJJI.
The only price for attaining the priceless divine Love for Shyama Shyam is shedding endless stream of longing tears. There is no other way to please them.
......SHRI MAHARAJJI.

वेदव्यास कहते है कि जितनी आराधनाएँ हैं, उपासनाएँ हैं- तामसी, उससे ऊंची राजसी, उससे ऊंची सात्विकी देवताओं की भक्ति, उससे ऊंची ब्रह्म की भक्ति, उससे ऊंची परमात्मा की भक्ति ,परमात्मा की भक्ति से ऊंची भगवान की और उनके अवतारों की भक्ति, और सबसे ऊंची भक्ति श्री राधाकृष्ण की, लेकिन श्री राधाकृष्ण की भक्ति से भी ऊंची है-उनके भक्तों की भक्ति।
भगवान के भक्तों की भक्ति से भगवान जितनी शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं,अपनी भक्ति से नहीं।
वेदव्यास कहते है कि जितनी आराधनाएँ हैं, उपासनाएँ हैं- तामसी, उससे ऊंची राजसी, उससे ऊंची सात्विकी देवताओं की भक्ति, उससे ऊंची ब्रह्म की भक्ति, उससे ऊंची परमात्मा की भक्ति ,परमात्मा की भक्ति से ऊंची भगवान की और उनके अवतारों की भक्ति, और सबसे ऊंची भक्ति श्री राधाकृष्ण की, लेकिन श्री राधाकृष्ण की भक्ति से भी ऊंची है-उनके भक्तों की भक्ति।
भगवान के भक्तों की भक्ति से भगवान जितनी शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं,अपनी भक्ति से नहीं।

 
 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...