Friday, February 8, 2013

To derive spiritual benefit, the mind must be exclusively united with the omnipresent God.
उस व्यापक ईश्वर का लाभ पाने के लिये ईश्वर में मन को एक करना होगा।
***jagadguru shri kripalu ji maharaj***
To derive spiritual benefit, the mind must be exclusively united with the omnipresent God. 
उस व्यापक ईश्वर का लाभ पाने के लिये ईश्वर में मन को एक करना होगा।
******jagadguru shri kripalu ji maharaj******

 
 

देखिये , दो बात पर जोर दिया जा रहा है ! एक तो इष्टदेव का ध्यान , क्योंकि उपासना मनको करनी है इसलिये नं . 1- रूपध्यान ! और दूसरी चीज़ जो सामने लाई गयी वह है सेवा वासना बढ़ाना ! मैंने आप लोगों को बताया था न कि जो दिव्य प्रेम गुरु के द्वारा मिलेगा उस प्रेम से सेवा मिलेगी ! तो अंतिम लक्ष्य सेवा है ! इसलिये अभी से सेवा की वासना बढ़ाना है ! अब भगवान् जब तक प्राप्त नहीं हैं गुरु सेवा बढ़ाना है , वह भावना , वासना वह इच्छा बढ़ाना है ! अपनी शक्ति के अनुसार वह सेवा भावना गुरु के प्रति हुई , भगवान के प्रति वाला फल देती है ! और फिर वह वासना साधना करते - करते जब भगवत प्राप्ति कराती है तो सेवा में
उसका बहुत बड़ा उपयोग स्वाभाविक रूप से हो जाता है ! इसलिये दो बांते ध्यान रखनी हैं - मन से रूपध्यान और सेवा वासना बढ़ाना !
*************जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज***************
देखिये , दो बात पर जोर दिया जा रहा है ! एक तो इष्टदेव का ध्यान , क्योंकि उपासना मनको करनी है इसलिये  नं . 1- रूपध्यान ! और दूसरी चीज़ जो सामने लाई गयी वह है सेवा वासना बढ़ाना ! मैंने आप लोगों को बताया था न कि जो दिव्य प्रेम गुरु के द्वारा मिलेगा उस प्रेम से सेवा मिलेगी ! तो अंतिम लक्ष्य सेवा है ! इसलिये अभी से सेवा की वासना बढ़ाना है ! अब भगवान् जब तक प्राप्त नहीं हैं गुरु सेवा बढ़ाना है , वह भावना , वासना वह इच्छा बढ़ाना है ! अपनी शक्ति के अनुसार वह सेवा भावना गुरु के प्रति हुई , भगवान के प्रति वाला फल देती है ! और फिर वह वासना साधना करते - करते जब भगवत प्राप्ति कराती है तो सेवा में 
उसका बहुत बड़ा उपयोग स्वाभाविक रूप से हो जाता है ! इसलिये दो बांते ध्यान रखनी हैं - मन से रूपध्यान और सेवा वासना बढ़ाना !
*************जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज***************

 

Thursday, February 7, 2013

God showers His grace only when your heart is completely purified, which is possible only by practicing devotion under the guidance of genuine Guru.
...........SHRI MAHARAJJI.
God showers His grace only when your heart is completely purified, which is possible only by practicing devotion under the guidance of genuine Guru.
...........SHRI MAHARAJJI.


Constantly engross yourself in remembrance of God, so that this remembrance remains even at the time of death.
......SHRI MAHARAJJI.
Constantly engross yourself in remembrance of God, so that this remembrance remains even at the time of death.
......SHRI MAHARAJJI.

 

Only one who is equally devoted to God and Guru attains the supreme goal.
.......SHRI MAHARAJJI.
Only one who is equally devoted to God and Guru attains the supreme goal.
.......SHRI MAHARAJJI.

 

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु के श्रीमुख से:-
'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के स्मरण को मरण तक बढ़ाते रहना है। यह एक क्षण का स्मरण जब एक क्षण को भी विस्मृत न हो ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु के श्रीमुख से:-
'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के स्मरण को मरण तक बढ़ाते रहना है। यह एक क्षण का स्मरण जब एक क्षण को भी विस्मृत न हो ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।

 

भगवान कहते हैं :- मेरी कृपा का रहस्य तुम इतना मान लो की जो कुछ भी हो रहा है वो सब "कृपा" ही है।
------श्री महाराजजी।
भगवान कहते हैं :- मेरी कृपा का रहस्य तुम इतना मान लो की जो कुछ भी हो रहा है वो सब "कृपा" ही है।
------श्री महाराजजी।


मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...