This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Tuesday, February 12, 2013
Monday, February 11, 2013
When a pious soul happens to associate with a divine personality,his heart is drawn towards him,which later on takes the shape of affection.again,when his mind becomes dedicated to the divine personality,he receives his grace,which,in turn gradually appears as a growing state of 'divine love consciousness' in the heart of the devotee.
You have one enemy, and it's not your body or your senses or your soul. Your one and only enemy is the mind, which you must govern and take towards God. You must not allow it to dictate you. If you do what your mind tells you to do, you will continue to revolve in 8.4 million forms of life for innumerable lives.
आ जाओ मेरे प्यारे बच्चों ......
चिंता न करो.......
मैं हूँ न?......
बस मुझसे प्यार ही तो करना है तुम्हे....येन केन प्रकारेण.......
बाकी सब मैं देख लूँगा........
... जैसे संसार मैं प्यार करते हैं ठीक वैसे ही ...
लेकिन शर्त वही रहेगी...नित्य , निष्काम , अनन्य ...
मन केवल हरि-गुरु में ही रखो बस .. काम हो जायेगा...
अभ्यास तो करना ही पड़ेगा तुम सब को ..
अनंत जन्म का गलत अभ्यास जो कर रखा है तुम सब ने इसीलिए...
"बरबस पतितन देत प्रेम रस , अस रसिकन सरताज "
हरी गुरु चिंतन साधना , साध्य प्रेम निष्काम।
दिव्य दरस की प्यास नित , बाढ़े आठों याम।।
------तुम्हारा कृपालु।
चिंता न करो.......
मैं हूँ न?......
बस मुझसे प्यार ही तो करना है तुम्हे....येन केन प्रकारेण.......
बाकी सब मैं देख लूँगा........
... जैसे संसार मैं प्यार करते हैं ठीक वैसे ही ...
लेकिन शर्त वही रहेगी...नित्य , निष्काम , अनन्य ...
मन केवल हरि-गुरु में ही रखो बस .. काम हो जायेगा...
अभ्यास तो करना ही पड़ेगा तुम सब को ..
अनंत जन्म का गलत अभ्यास जो कर रखा है तुम सब ने इसीलिए...
"बरबस पतितन देत प्रेम रस , अस रसिकन सरताज "
हरी गुरु चिंतन साधना , साध्य प्रेम निष्काम।
दिव्य दरस की प्यास नित , बाढ़े आठों याम।।
------तुम्हारा कृपालु।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






