Wednesday, February 13, 2013

दिव्य द्रष्टि प्रदान कर हरि का प्रत्यक्ष दर्शन करा देते हैं !
...........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

सूर्य के उदय होते ही प्रकाश पा कर वस्तुएँ दिखायी देने लगती हैं ! इसी प्रकार संत दिव्य द्रष्टि प्रदान कर हरि का प्रत्यक्ष दर्शन करा देते हैं !
...........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 
 

 
‎"Tears are an absolutely essential part of sadhana. By shedding tears for God and Guru, we wash our sins away. Then, God and Guru enter the heart and make it pure."
-------shri maharaj ji.
"Tears are an absolutely essential part of sadhana. By shedding tears for God and Guru, we wash our sins away. Then, God and Guru enter the heart and make it pure."
-------shri maharaj ji.
 
 
जब तक माया के अधीन हो तब तक क्यों सोचते हो कि मैं प्रशंसा के योग्य हूँ ! जब तक तुम शरणागत नहीं हुए तब तक तुम्हे अहंकार किस बात का ? किसी भी जीव का वास्तविक स्वरूप श्री कृष्ण दासत्व ही है ! श्री कृष्ण के दास बन जाओ फिर खूब अहंकार करो ! हम छूट देते हैं ! लेकिन उस समय तुम अहंकार कर ही नहीं सकते ! भगवत्प्राप्ति से पहले रहता है अहंकार ! अतः सदा सावधान रहो !
---------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।
जब तक माया के अधीन हो तब तक क्यों सोचते हो कि मैं प्रशंसा के योग्य हूँ ! जब तक तुम शरणागत नहीं हुए तब तक तुम्हे अहंकार किस बात का ? किसी भी जीव का वास्तविक स्वरूप श्री कृष्ण दासत्व ही है ! श्री कृष्ण के दास बन जाओ फिर खूब अहंकार करो ! हम छूट देते हैं ! लेकिन उस समय तुम अहंकार कर ही नहीं सकते ! भगवत्प्राप्ति से पहले रहता है अहंकार ! अतः सदा सावधान रहो !
---------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।

 



 
क्रोध आवे भी तो भीतर ही रहने दो ! बाहर न आने पावे ये अभ्यास कर लो ! फिर उसके बाद भीतर भी न आने पावे ये अभ्यास कर लो ! एक साहब अपने सर्वेन्ट को डाँटता है कि देर से आया बेवकूफ , गधा और वो कहता है यस सर , यस सर ! भीतर गुस्सा है , बाहर यस सर क्योंकि अगर वो भी कह दे कि गधे ! तुम भी तो देर से आते हो ऑफिस ! भीतर से ऐसे ही कह रहा है लेकिन बाहर से कन्ट्रोल किये हुये है ! कटु वाक्य न बोलो , किसी के अपमान करने पर बाहर से उसका प्रतिवाद न करो और फिर भीतर से निकालो ! सब फैक्ट है ! मान लो तुम ऐसे हो !
*****जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*****
क्रोध आवे भी तो भीतर ही रहने दो ! बाहर न आने पावे ये अभ्यास कर लो ! फिर उसके बाद भीतर भी न आने पावे ये अभ्यास कर लो ! एक साहब अपने सर्वेन्ट को डाँटता है कि देर से आया बेवकूफ ,  गधा और वो कहता है यस सर , यस सर ! भीतर गुस्सा है , बाहर यस सर क्योंकि अगर वो भी कह दे कि गधे ! तुम भी तो देर से आते हो ऑफिस ! भीतर से ऐसे ही कह रहा है लेकिन बाहर से कन्ट्रोल किये हुये है ! कटु वाक्य न बोलो , किसी के अपमान करने पर  बाहर से उसका प्रतिवाद न करो और फिर भीतर से निकालो ! सब फैक्ट है ! मान लो तुम ऐसे हो ! 
**************जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*************
क्रोध बहुत बड़ा दुश्मन है !
--श्री महाराज जी।
क्रोध  बहुत बड़ा दुश्मन है !
--श्री महाराज जी।

 

Tuesday, February 12, 2013

"हरि गुरु की सेवा से, हरि गुरु के निरंतर स्मरण से हमारा अन्तः करण शुद्ध होगा ।
ये प्रतिज्ञा कर लो सब लोग की जब आपस मे मिलो तो केवल भगवद् चर्चा करो और यदि दूसरा न करे तो वहाँ से तुरंत चले जाओ, हट जाओ । इस प्रकार कुसंग से बचो । जो कमाइए उसको लॉक करके रखिए, लापरवाही मत कीजिये ।"
......श्री महाराजजी।

"हरि गुरु की सेवा से, हरि गुरु के निरंतर स्मरण से हमारा अन्तः करण शुद्ध होगा ।
 ये प्रतिज्ञा कर लो सब लोग की जब आपस मे मिलो तो केवल भगवद् चर्चा करो और यदि दूसरा न करे तो वहाँ से तुरंत चले जाओ, हट जाओ । इस प्रकार कुसंग से बचो । जो कमाइए उसको लॉक करके रखिए, लापरवाही मत कीजिये ।"
 ......श्री महाराजजी।

 
 
     

Try to see God's grace in everything that happens in your life. Do not notice His grace only when positive things happen in your life but even in negative things whether your house is burnt, your money is stolen, you lose your job, you are defamed. If you are able to see God's grace even in negative situations in life, you are making spiritual progress and are practically able to apply Tattva gyan (Spiritual Knowledge).
Try to see God's grace in everything that happens in your life. Do not notice His grace only when positive things happen in your life but even in negative things whether your house is burnt, your money is stolen, you lose your job, you are defamed. If you are able to see God's grace even in negative situations in life, you are making spiritual progress and are practically able to apply Tattva gyan (Spiritual Knowledge).

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...