Tuesday, February 19, 2013

वेद शास्त्र कहे सम्बन्ध,अभिधेय,प्रयोजन ; कृष्ण, कृष्ण-भक्त्ति, प्रेम तिन महाधन ... (गौरांग महाप्रभु)

समस्त्र शास्त्र-वेद केवल तीन बात बता रहे हैं- सम्बन्ध, अभिधेय,प्रयोजन । कृष्ण- ये सम्बन्ध, कृष्ण भक्त्ति- ये अभिधेय,और प्रेम- ये है प्रयोजन। हमारा भगवान् से सम्बन्ध नित्य दासत्व का है, वो हमारा नित्य स्वामी है, हम उसके नित्य दास है।इसलिये हमारा लक्ष्य है- प्रेम प्राप्त करके उनकी सेवा करना, उस प्रेम को प्राप्त करने के लिये अभिधेय है भक्ति । ये तिन महाधन है, महानिधियाँ है॥

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
वेद शास्त्र कहे सम्बन्ध,अभिधेय,प्रयोजन ; कृष्ण, कृष्ण-भक्त्ति, प्रेम तिन महाधन ... (गौरांग महाप्रभु)

समस्त्र शास्त्र-वेद केवल तीन बात बता रहे हैं- सम्बन्ध, अभिधेय,प्रयोजन । कृष्ण- ये सम्बन्ध, कृष्ण भक्त्ति- ये अभिधेय,और प्रेम- ये है प्रयोजन। हमारा भगवान् से सम्बन्ध नित्य दासत्व का है, वो हमारा नित्य स्वामी है, हम उसके नित्य दास है।इसलिये हमारा लक्ष्य है- प्रेम प्राप्त करके उनकी सेवा करना, उस प्रेम को प्राप्त करने के लिये अभिधेय है भक्ति । ये तिन महाधन है, महानिधियाँ है॥ 

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

 

हम आत्मा हैं , शरीर नहीं है , यह ज्ञान सर्वोपरि है !
**श्री महाराज जी**
हम आत्मा हैं , शरीर नहीं है , यह ज्ञान सर्वोपरि है ! 
**श्री महाराज जी**

 

अपने श्यामसुन्दर से ऐसा और इतना प्रेम बढ़ाओ जैसा और जितना कि कोई घोर कामिनी अपने मायिक प्रियतम के प्रति बढ़ती है ! तुम्हारा प्रियतम तो मायातीत दिव्य है कितने भाग्य है तुम्हारे !
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 

 
जो हरि सेवा हेतु हो, सोइ कर्म बखान।
जो हरि भगति बढावे, सोइ समुझिय ज्ञान॥

Only those actions done to please Shree Krishna are true actions. Whatever knowledge increases love for Shree Krishna is true knowledge.

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

जो हरि सेवा हेतु हो, सोइ कर्म बखान।
जो हरि भगति बढावे, सोइ समुझिय ज्ञान॥

Only those actions done to please Shree Krishna are true actions. Whatever knowledge increases love for Shree Krishna is true knowledge.

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
जो हरि सेवा हेतु हो, सोइ कर्म बखान।
जो हरि भगति बढावे, सोइ समुझिय ज्ञान॥

Only those actions done to please Shree Krishna are true actions. Whatever knowledge increases love for Shree Krishna is true knowledge.

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
 
हम लोग अपने स्वार्थ की द्रष्टि से गुरु तत्व को भगवान् से बड़ा मानते हैं ! है नहीं,! क्योंकि भगवान् संबंधी समस्त वेद - ज्ञान गुरु ही देगा ! मार्ग की बाधाओं को दूर करेगा तथा अन्त में भगवत्प्राप्ति भी वही करायेगा ! अंतःकरण की शुद्धि पर प्रेमदान वही करेगा !

********जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु**********
हम लोग अपने स्वार्थ की द्रष्टि से गुरु तत्व को भगवान् से बड़ा मानते  हैं ! है नहीं,! क्योंकि भगवान् संबंधी समस्त वेद - ज्ञान गुरु ही देगा ! मार्ग की बाधाओं को दूर करेगा तथा अन्त में भगवत्प्राप्ति भी वही करायेगा ! अंतःकरण की शुद्धि पर प्रेमदान वही करेगा !

********जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु**********

 

Sunday, February 17, 2013

बिना तत्वज्ञान के हम साधना नहीं कर सकते । भगवतप्राप्ति का तो प्रश्न ही नहीं है। तत्वज्ञान के बिना तो हम तर्क, कुतर्क संशय ही करते रहेंगे ,इसी में पूरा जीवन बीत जाएगा,मानव देह व्यर्थ चला जाएगा।
------श्री महाराजजी.
बिना तत्वज्ञान के हम साधना नहीं कर सकते । भगवतप्राप्ति का तो प्रश्न ही नहीं है। तत्वज्ञान के बिना तो हम तर्क, कुतर्क संशय ही करते रहेंगे ,इसी में पूरा जीवन बीत जाएगा,मानव देह व्यर्थ चला जाएगा।
 ------श्री महाराजजी.

 

हमें कीर्तन में नींद क्यों आती है ? क्योंकि हम अपने इष्टदेव का रूपध्यान नहीं करते ! श्यामसुन्दर को प्यार नहीं करते ! प्यार नहीं है इसलिये गुणगान करते समय ह्रदय नहीं पिघलता व हम ऊँघने लगते हैं !
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हमें कीर्तन में नींद क्यों आती है ? क्योंकि हम अपने इष्टदेव का रूपध्यान नहीं करते ! श्यामसुन्दर को प्यार नहीं करते ! प्यार नहीं है इसलिये गुणगान करते समय ह्रदय नहीं पिघलता व हम ऊँघने लगते हैं ! 
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...