Saturday, March 2, 2013

शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।

शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।

-------श्री कृपालु महाप्रभु।
शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।
 
शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।
 
-------श्री कृपालु महाप्रभु।

 
 
 

मन से तो हरि गुरु स्मरण कराय।
तन धन से जो बने सेवा भी कराय।।

Our beloved master teaches us to remember God and Guru by heart and inspires to render any service possible with body and wealth.
मन से तो हरि गुरु स्मरण कराय।
तन धन से जो बने सेवा भी कराय।।
 
Our beloved master teaches us to remember God and Guru by heart and inspires to render any service possible with body and wealth.

 

    It is a matter of great astonishment that one does not give up hope in trying to attain happiness in the world which does not have a trace of Bliss, but one so easily gives up hope on the path to God, where the attainment of Infinite Bliss is guaranteed.
    It is a matter of great astonishment that one does not give up hope in trying to attain happiness in the world which does not have a trace of Bliss, but one so easily gives up hope on the path to God, where the attainment of Infinite Bliss is guaranteed.

     

    Speak less, speak sweetly, increase your patience. Behave softly with each other and do not make anyone unhappy. This way the wealth of Sadhana that you have accumulated, will remain safe.
    Speak less, speak sweetly, increase your patience. Behave softly with each other and do not make anyone unhappy. This way the wealth of Sadhana that you have accumulated, will remain safe.

     

    एक सद्गुरु जो जागा हुआ है, वह सोये हुए को हिला सकता है, जागा सकता है, हालाकि तुम सद्गुरु को भी धोखा दे जाते हो। उससे कहते हो, बस! उठता हूँ। करवट लेकर, आँखें बंद करके, फिर सो जाते हो। अकेले तो तुम्हारा जागना करीब-करीब असंभव है।
    एक सद्गुरु जो जागा हुआ है, वह सोये हुए को हिला सकता है, जागा सकता है, हालाकि तुम सद्गुरु को भी धोखा दे जाते हो। उससे कहते हो, बस! उठता हूँ। करवट लेकर, आँखें बंद करके, फिर सो जाते हो। अकेले तो तुम्हारा जागना करीब-करीब असंभव है।

     

    गुरु ने बताया मोहिं गोविंद राधे।
    उन्हीं का दिया है उन्हीं को लुटा दे।।
    ......श्री महाराजजी।
    गुरु ने बताया मोहिं गोविंद राधे। 
उन्हीं का दिया है उन्हीं को लुटा दे।।
......श्री महाराजजी।

     

    संसार में जिसे तुम बहुत अपना मानते हो........माँ , बाप , भाई, बीवी, दोस्त ....... अगर वो एक बार तुमसे कोई जरा सा झूठ बोल दे तो कितना फील करते हैं न आप लोग ??कितना अपमान लगता है न अपना की हमसे झूठ बोला इसने जबकि मैं इसे कितना अपना मानता हूँ......

    और कभी सोचा है कि..........वो गुरु और भगवान .....जो तुम्हे सबसे ज्यादा अपना मानते है ...अरे मानना क्या है....... तुम्हारा वास्तव में माँ बाप भाई प्रियतम और है ही कौन .....सारे रिश्ते तो उन्हीं से हैं न ..... , वो तुम सब की तरफ हर पल इसी आशा में देखते रहते है कि अबकी बार ये सच ही बोल रहा है , कीर्तन में जो लाइन बोल रहा है वो सच ही बोल रहा है .....अबकी बार ये पूर्ण शरणागत हो जायेगा और मैं इसे प्रेम दान कर दूंगा .............पर होता क्या है ...........हम झूठ पे झूठ- झूठ पे झूठ-झूठ पे झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ....कोई परवाह ही नहीं है ...वो हमे परखते ही रहे जा रहे हैं अनंत काल से ..... और हम झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ......... संसार के रिश्तों को तो वास्तव में अपना मानते हैं और जो वास्तव में अपने हैं उनसे झूठ बोले जा रहे हैं.............. कमाल है ...कभी सोचा है कि कितना दुःख होता होगा उन्हें ?????

    अपना अपमान अपमान है बस.........गुरु और भगवान का अपमान अपमान नहीं है क्या ? उन्हें कितना फील होता होगा जरा सोचो।

    ------- तुम्हारा कृपालु।
    संसार में जिसे तुम बहुत अपना मानते हो........माँ , बाप , भाई, बीवी, दोस्त ....... अगर वो एक बार तुमसे कोई जरा सा झूठ बोल दे तो कितना फील करते हैं न आप लोग ??कितना अपमान लगता है न अपना की हमसे झूठ बोला इसने जबकि मैं इसे कितना अपना मानता हूँ......
 
और कभी सोचा है कि..........वो गुरु और भगवान .....जो तुम्हे सबसे ज्यादा अपना मानते है ...अरे मानना क्या है....... तुम्हारा वास्तव में माँ बाप भाई प्रियतम और है ही कौन .....सारे रिश्ते तो उन्हीं से हैं न ..... , वो तुम सब की तरफ हर पल इसी आशा में देखते रहते है कि अबकी बार ये सच ही बोल रहा है , कीर्तन में जो लाइन बोल रहा है वो सच ही बोल रहा है .....अबकी बार ये पूर्ण शरणागत हो जायेगा और मैं इसे प्रेम दान कर दूंगा .............पर होता क्या है ...........हम झूठ पे झूठ- झूठ पे झूठ-झूठ पे झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ....कोई परवाह ही नहीं है ...वो हमे परखते ही रहे जा रहे हैं अनंत काल से ..... और हम झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ......... संसार के रिश्तों को तो वास्तव में अपना मानते हैं और जो वास्तव में अपने हैं उनसे झूठ बोले जा रहे हैं.............. कमाल है ...कभी सोचा है कि कितना दुःख होता होगा उन्हें ????? 

अपना अपमान अपमान है बस.........गुरु और भगवान का अपमान अपमान नहीं है क्या ? उन्हें कितना फील होता होगा जरा सोचो।

------- तुम्हारा कृपालु।

     

    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...