Monday, March 4, 2013

वेदव्यास कहते है कि जितनी आराधनाएँ हैं, उपासनाएँ हैं- तामसी, उससे ऊंची राजसी, उससे ऊंची सात्विकी देवताओं की भक्ति, उससे ऊंची ब्रह्म की भक्ति, उससे ऊंची परमात्मा की भक्ति ,परमात्मा की भक्ति से ऊंची भगवान की और उनके अवतारों की भक्ति, और सबसे ऊंची भक्ति श्री राधाकृष्ण की, लेकिन श्री राधाकृष्ण की भक्ति से भी ऊंची है-उनके भक्तों की भक्ति।
भगवान के भक्तों की भक्ति से भगवान जितनी शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं,अपनी भक्ति से नहीं।
वेदव्यास कहते है कि जितनी आराधनाएँ हैं, उपासनाएँ हैं- तामसी, उससे ऊंची राजसी, उससे ऊंची सात्विकी देवताओं की भक्ति, उससे ऊंची ब्रह्म की भक्ति, उससे ऊंची परमात्मा की भक्ति ,परमात्मा की भक्ति से ऊंची भगवान की और उनके अवतारों की भक्ति, और सबसे ऊंची भक्ति श्री राधाकृष्ण की, लेकिन श्री राधाकृष्ण की भक्ति से भी ऊंची है-उनके भक्तों की भक्ति।
 भगवान के भक्तों की भक्ति से भगवान जितनी शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं,अपनी भक्ति से नहीं।

 

श्रीकृष्ण , सूर्य के समान हैं। जीवगण , सूर्य की किरन के समान हैं एवं गुणमयी माया अंधकार के समान है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
श्रीकृष्ण , सूर्य के समान हैं। जीवगण , सूर्य की किरन के समान हैं एवं गुणमयी माया अंधकार के समान है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 

भगवान् के निमित किया हुआ पाप भी धर्म हो जाता है जाता है एवं भगवान् को छोड़कर किया हुआ धर्म भी पाप हो जाता है !
~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~
भगवान् के निमित किया हुआ पाप भी धर्म हो जाता है जाता है एवं भगवान् को छोड़कर किया हुआ धर्म भी पाप हो जाता है !
~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~

 

तुम अपने स्वार्थ पर विचार करो। परोपकार की बात ना सोचो। और विचार त्यागकर , श्रीकृष्ण से प्यार करो।

``````````जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज````````````
तुम अपने स्वार्थ पर विचार करो। परोपकार की  बात ना सोचो। और विचार त्यागकर , श्रीकृष्ण से प्यार करो।

``````````जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज````````````

 

वास्तविक गुरु के निरंतर सत्संग से ही जीव संसार से विमुख होकर श्रीकृष्ण भक्ति करेगा।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
वास्तविक गुरु के निरंतर सत्संग से ही जीव संसार से विमुख होकर श्रीकृष्ण भक्ति करेगा।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 

संसारी लोग उसी से प्यार करते हैं , जिसके पास संसारी वैभव होता है। किन्तु श्यामसुन्दर अकिंचन से प्यार करते हैं।
~~~~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~

 

भगवान् एवं महापुरुषों के किसी भी कार्य का एक ही कारण है। वह यह कि उनका स्वभाव ही केवल परोपकार का होता है।
~~~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु~~~~~~~


भगवान् एवं महापुरुषों के किसी भी कार्य का एक ही कारण है। वह यह कि उनका स्वभाव ही केवल परोपकार का होता है।
~~~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु~~~~~~~

 
 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...