Thursday, March 7, 2013

खल मिलि दु:ख देत गोविंद राधे |
सन्त बिछुरि दुख देत बता दे ||

भावार्थ- दुष्टों के मिलन में महान दु:ख की प्राप्ति होती है तो संतों के वियोग में |

...
नारियल सम सन्त गोविंद राधे |
बाहर कठोर भीतर मधुर बता दे ||

भावार्थ- संतजन नारियल फल के समान बाहर से कठोर तथा भीतर से सरस होते हैं |

बेर फल सम खल गोविंद राधे |
भीतर कठोर बाहर मधुर बता दे ||

भावार्थ- दुर्जन बेर के फल के समान बाहर मनोहर और भीतर से कठोर होते हैं |

खलमुख पद्मदल गोविंद राधे |
वाणी मधुर उर कैंची बता दे ||

भावार्थ- दुष्टों के मुख की वाणी कमल-दल के समान सुन्दर और मधुर अनुभव होती है किन्तु उनके हृदय में कपट की कैंची सी चला करती हैं |

..................राधा गोविंद गीत--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
खल मिलि दु:ख देत गोविंद राधे |
सन्त बिछुरि दुख देत बता दे ||

भावार्थ- दुष्टों के मिलन में महान दु:ख की प्राप्ति होती है तो संतों के वियोग में |

नारियल सम सन्त गोविंद राधे | 
बाहर कठोर भीतर मधुर बता दे ||

भावार्थ- संतजन नारियल फल के समान बाहर से कठोर तथा भीतर से सरस होते हैं |

बेर फल सम खल गोविंद राधे |
भीतर कठोर बाहर मधुर बता दे || 

भावार्थ- दुर्जन बेर के फल के समान बाहर मनोहर और भीतर से कठोर होते हैं |

खलमुख पद्मदल गोविंद राधे | 
वाणी मधुर उर कैंची बता दे ||

भावार्थ- दुष्टों के मुख की वाणी कमल-दल के समान सुन्दर और मधुर अनुभव होती है किन्तु उनके हृदय में कपट की कैंची सी चला करती हैं |


 ..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ).................


"ALWAYS REMEMBER: God's names, forms, attributes, pastimes, abodes and His saints are all one and the same, therefore keeping your mind attached to any of these is known as devotion."
........SHRI MAHARAJJI.

"ALWAYS REMEMBER: God's names, forms, attributes, pastimes, abodes and His saints are all one and the same, therefore keeping your mind attached to any of these is known as devotion."
........SHRI MAHARAJJI.

 

 
"‘Radha’ name is Radha Herself. If you just realize this truth, it is enough to explode your feelings of love for Her and to really feel Her presence in front of you…
------Shri Maharajji."
"‘Radha’ name is Radha Herself. If you just realize this truth, it is enough to explode your feelings of love for Her and to really feel Her presence in front of you… 
------Shri Maharajji."
 
 
Shri Maharaj Ji reminds us:

Rob God and Guru of everything by offering Them body, mind and soul. If you do not offer these to God and Guru, people of the world will certainly rob you of them.
Shri Maharaj Ji reminds us:

 Rob God and Guru of everything by offering Them body, mind and soul. If you do not offer these to God and Guru, people of the world will certainly rob you of them.
भक्तियुक्तचित्त द्वारा भगवन्नाम संकीर्तन करते हुये करुण क्रंदन करो. व्याकुलता बढाओ.व्याकुलता ही भक्ति का आधार है.

------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
भक्तियुक्तचित्त द्वारा भगवन्नाम संकीर्तन करते हुये करुण क्रंदन करो. व्याकुलता बढाओ.व्याकुलता ही भक्ति का आधार है.
 
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

 

"हमारे श्री महाराजजी कलिमल ग्रसित अधम जीवों को भी सचमुच बरबस ब्रजरस में सराबोर करना चाहते हैं। उनके श्रीमुख से नि:सृत संकीर्तन ब्रज रस ही है, पीने वाला होना चाहिये। श्री महाराजजी की रचनाओं में निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है, फिर भी हम जैसे पतित जीव भी इतना तो महसूस करते ही हैं कि ऐसा रस कभी नहीं मिला।

****बोलिये रसिक-शिरोमणि भगवान श्री कृपालुजी महाराज की जय.........................."

"हमारे श्री महाराजजी कलिमल ग्रसित अधम जीवों को भी सचमुच बरबस ब्रजरस में सराबोर करना चाहते हैं। उनके श्रीमुख से नि:सृत संकीर्तन ब्रज रस ही है, पीने वाला होना चाहिये। श्री महाराजजी की रचनाओं में निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है, फिर भी हम जैसे पतित जीव भी इतना तो महसूस करते ही हैं कि ऐसा रस कभी नहीं मिला।

 ****बोलिये रसिक-शिरोमणि भगवान श्री कृपालुजी महाराज की जय.........................."


Only the person whose mind is not attached to any material object attains Supreme Peace.
जिसका मन संसार के किसी पदार्थ में न हो, एसा व्यक्ति ही परम शान्ति का अधिकारी बन सकता है।
-------Jagadguru shri kripalu ji maharaj.
Only the person whose mind is not attached to any material object attains Supreme Peace.
जिसका मन संसार के किसी पदार्थ में न हो, एसा व्यक्ति ही परम शान्ति का अधिकारी बन सकता है।
-------Jagadguru shri kripalu ji maharaj.

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...