Wednesday, March 20, 2013

The only price for attaining the priceless divine Love for Shyama Shyam is shedding endless stream of longing tears. There is no other way to please them.
......SHRI MAHARAJJI.
The only price for attaining the priceless divine Love for Shyama Shyam is shedding endless stream of longing tears. There is no other way to please them.
 ......SHRI MAHARAJJI.

 

Always Retain The Thought Of Hari-Guru In Your Mind And Heart.
.....SHRI MAHARAJJI.
Always Retain The Thought Of Hari-Guru In Your Mind And Heart.
 .....SHRI MAHARAJJI.

 

अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? करुणानिधि के समक्ष दीन बन कर एक बार सच्चे हृदय से कह कर देखो।

श्री कृपालु महाप्रभु।
अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? करुणानिधि के समक्ष दीन बन कर एक बार सच्चे हृदय से कह कर देखो। 

श्री कृपालु महाप्रभु।

 
एक सद्गुरु जो जागा हुआ है, वह सोये हुए को हिला सकता है, जागा सकता है, हालाकि तुम सद्गुरु को भी धोखा दे जाते हो। उससे कहते हो, बस! उठता हूँ। करवट लेकर, आँखें बंद करके, फिर सो जाते हो। अकेले तो तुम्हारा जागना करीब-करीब असंभव है।
एक सद्गुरु जो जागा हुआ है, वह सोये हुए को हिला सकता है, जागा सकता है, हालाकि तुम सद्गुरु को भी धोखा दे जाते हो। उससे कहते हो, बस! उठता हूँ। करवट लेकर, आँखें बंद करके, फिर सो जाते हो। अकेले तो तुम्हारा जागना करीब-करीब असंभव है।

 
 
     

इकला ही आया जग गोविन्द राधे,
इकला ही काल तेरा टिकेट कटा दे।

केवल जो कर्म किया है, अच्छा या बुरा वह साथ जायेगा. तन,मन,धन इन का जो उपयोग चार एरिया में किया है- तामसी, राजसी,सात्विक, और भगवान, जिसने जिस एरिया में इन तीनो का उपयोग किया है, उसी एरिया में जाना होगा. हम नहीं जायेंगे नरक में ,बड़ा कष्ट होगा. अरे ! तो पहले क्यों नहीं सोचा. जब संतो ने कहा- अरे ! टाइम निकालो भगवान की भक्ति के लिये, इस शरीर को भगवान की और लगाओ, मन को लगाओ. तब आप लोगो ने कहा की गुरूजी तो ऐसी बाते करते है. हम तो गृहस्थी है, अपने बाल-बच्चों के लिये करेंगे. अब कहा है बाल बच्चे ? अकेले जाना पड़ेगा ! बाल-बच्चे कोई नहीं जायेंगे।

........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
"इकला ही आया जग गोविन्द राधे,
 इकला ही काल तेरा टिकेट कटा दे।
 
केवल जो कर्म किया है, अच्छा या बुरा वह साथ जायेगा. तन,मन,धन इन का जो उपयोग चार एरिया में किया है- तामसी, राजसी,सात्विक, और भगवान, जिसने जिस एरिया में इन तीनो का उपयोग किया है, उसी एरिया में जाना होगा. हम नहीं जायेंगे नरक में ,बड़ा कष्ट होगा. अरे ! तो पहले क्यों नहीं सोचा. जब संतो ने कहा- अरे ! टाइम निकालो भगवान की भक्ति के लिये, इस शरीर को भगवान की और लगाओ, मन को लगाओ. तब आप लोगो ने कहा की गुरूजी तो ऐसी बाते करते है. हम तो गृहस्थी है, अपने बाल-बच्चों के लिये करेंगे. अब कहा है बाल बच्चे ? अकेले जाना पड़ेगा ! बाल-बच्चे कोई नहीं जायेंगे।
 
........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

 



गुरु:कृपालुर्मम शरणम वन्देsहं सदगुरुचरणम..........
गुरु: कृपालुर्मम शरणम वन्देsहं सदगुरुचरणम...............

 



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तेरे मिलने से जैसे सब बदल गया ..... तेरी रोशनी के सांये में नयी दुनिया सी मिली

मेरा आसमां भी अब छोटा पड़ गया ......... मुझे जब से है बाहों में तेरी पनाह मिली
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तेरे मिलने से जैसे सब बदल गया ..... तेरी रोशनी के सांये में नयी दुनिया सी मिली 

मेरा आसमां भी अब छोटा पड़ गया ......... मुझे जब से है बाहों में तेरी पनाह मिली 
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...