Friday, March 22, 2013

अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? करुणानिधि के समक्ष दीन बन कर एक बार सच्चे हृदय से कह कर देखो।

श्री कृपालु महाप्रभु।
अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? करुणानिधि के समक्ष दीन बन कर एक बार सच्चे हृदय से कह कर देखो। 

श्री कृपालु महाप्रभु।

 

तेरो सुत मानत सब तेरो, माँ इक काम करा दे मेरो,
मोहे सो ले बनाये निज चेरो, रहिहों ऋणी तोर बहुतेरो........
तेरो सुत मानत सब तेरो, माँ इक काम करा दे मेरो,
 मोहे सो ले बनाये निज चेरो, रहिहों ऋणी तोर बहुतेरो........

 
 

मन! मैं को मत छोड़ तू,दास जोड़ दे और।
मेरा भी रख साथ में,सो रसिकन सिरमौर।।

भावार्थ: हे मन ! तू मैं को मत छोड़। वरन 'मैं' के आगे 'दास' को और जोड़ दे(मैं दास हूँ),'मेरा' भी मत छोड़। वरन 'मेरा' के आगे 'रसिक शेखर श्रीकृष्ण' जोड़ दे। (मेरे स्वामी)।

..........श्री महाराजजी।
मन! मैं को मत छोड़ तू,दास जोड़ दे और।
मेरा भी रख साथ में,सो रसिकन सिरमौर।।

भावार्थ: हे मन ! तू मैं को मत छोड़। वरन 'मैं' के आगे 'दास' को और जोड़ दे(मैं दास हूँ),'मेरा' भी मत छोड़। वरन 'मेरा' के आगे 'रसिक शेखर श्रीकृष्ण' जोड़ दे। (मेरे स्वामी)।

..........श्री महाराजजी।

 

माना मैंने पिछला बिगारा नंदनंदन, अगला तो अब तू बना दे नंदनंदन।
माना मैं हूँ सब विधि दोषी नंदनंदन, तू तो है 'कृपालु' कृपा करो नंदनंदन।।
माना मैंने पिछला बिगारा नंदनंदन, अगला तो अब तू बना दे नंदनंदन।
 माना मैं हूँ सब विधि दोषी नंदनंदन, तू तो है 'कृपालु' कृपा करो नंदनंदन।।

 

सारा विश्व दान करो गोविंद राधे ,तो भी गुरु ऋण से न उऋण करा दे !!!
सारा विश्व दान करो गोविंद राधे ,तो भी गुरु ऋण से न उऋण करा दे !!!

 



मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है। भगवान केवल भाव नोट करते हैं, क्रिया नहीं। जो कर्म भगवान में प्रेम उत्पन्न नहीं करता, वह अधर्म ही है। जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान में आसक्त हो वही साधना है।
------- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज।
मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है। भगवान केवल भाव नोट करते हैं, क्रिया नहीं। जो कर्म भगवान में प्रेम उत्पन्न नहीं करता, वह अधर्म ही है। जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान में आसक्त हो वही साधना है।
 ------- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज।

 



EMBODIMENT OF LOVE AND BLISS,

O, OCEAN OF GRACE!

DEAR AMMA,MAHARAJJI,


BE WITH US FOREVER...................

*****RADHEY-RADHEY*****
EMBODIMENT OF LOVE AND BLISS,

 O, OCEAN OF GRACE!

 DEAR AMMA,MAHARAJJI,
 

BE WITH US FOREVER...................

 *****RADHEY-RADHEY*****

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...