Sunday, March 24, 2013

गुरु को अपना इष्टदेव , अपनी आत्मा मानो। अर्थात आत्मा से भी आराध्य है गुरु ऐसा मानकर जो उपासना करेगा , उसी को भगवत्प्राप्ति हो सकती है।

...........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।
गुरु को अपना इष्टदेव , अपनी आत्मा मानो। अर्थात आत्मा से भी आराध्य है गुरु ऐसा मानकर जो उपासना करेगा , उसी को भगवत्प्राप्ति हो सकती है।
 
...........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।

 

Friday, March 22, 2013

A pure devotee is never disturbed in any circumstances. Nor is he envious of anyone. Nor does a devotee become his enemy's enemy.

One who is not envious but is a kind friend to all living entities, who does not think himself a proprietor and is free from false ego, who is equal in both happiness and distress, who is tolerant, always satisfied, self-controlled, and engaged in devotional service with determination, his mind and intelligence fixed on Me—such a devotee of Mine is very dear to Me."

A pure devotee is never disturbed in any circumstances. Nor is he envious of anyone. Nor does a devotee become his enemy's enemy.

 One who is not envious but is a kind friend to all living entities, who does not think himself a proprietor and is free from false ego, who is equal in both happiness and distress, who is tolerant, always satisfied, self-controlled, and engaged in devotional service with determination, his mind and intelligence fixed on Me—such a devotee of Mine is very dear to Me."

 
हृदय में ज्ञान का दीपक जलाने वाले गुरु साक्षात भगवान ही हैं। जो पुरुष उन्हे मनुष्य समझते हैं उनका समस्त शास्त्र-श्रवण हाथी के स्नान के समान व्यर्थ है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज.

 

इकला ही आया जग गोविन्द राधे,
इकला ही काल तेरा टिकेट कटा दे।

केवल जो कर्म किया है, अच्छा या बुरा वह साथ जायेगा. तन,मन,धन इन का जो उपयोग चार एरिया में किया है- तामसी, राजसी,सात्विक, और भगवान, जिसने जिस एरिया में इन तीनो का उपयोग किया है, उसी एरिया में जाना होगा. हम नहीं जायेंगे नरक में ,बड़ा कष्ट होगा. अरे ! तो पहले क्यों नहीं सोचा. जब संतो ने कहा- अरे ! टाइम निकालो भगवान की भक्ति के लिये, इस शरीर को भगवान की और लगाओ, मन को लगाओ. तब आप लोगो ने कहा की गुरूजी तो ऐसी बाते करते है. हम तो गृहस्थी है, अपने बाल-बच्चों के लिये करेंगे. अब कहा है बाल बच्चे ? अकेले जाना पड़ेगा ! बाल-बच्चे कोई नहीं जायेंगे।

........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

"इकला ही आया जग गोविन्द राधे,
 इकला ही काल तेरा टिकेट कटा दे।
 
केवल जो कर्म किया है, अच्छा या बुरा वह साथ जायेगा. तन,मन,धन इन का जो उपयोग चार एरिया में किया है- तामसी, राजसी,सात्विक, और भगवान, जिसने जिस एरिया में इन तीनो का उपयोग किया है, उसी एरिया में जाना होगा. हम नहीं जायेंगे नरक में ,बड़ा कष्ट होगा. अरे ! तो पहले क्यों नहीं सोचा. जब संतो ने कहा- अरे ! टाइम निकालो भगवान की भक्ति के लिये, इस शरीर को भगवान की और लगाओ, मन को लगाओ. तब आप लोगो ने कहा की गुरूजी तो ऐसी बाते करते है. हम तो गृहस्थी है, अपने बाल-बच्चों के लिये करेंगे. अब कहा है बाल बच्चे ? अकेले जाना पड़ेगा ! बाल-बच्चे कोई नहीं जायेंगे।
 
........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

 

अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? करुणानिधि के समक्ष दीन बन कर एक बार सच्चे हृदय से कह कर देखो।

श्री कृपालु महाप्रभु।
अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? करुणानिधि के समक्ष दीन बन कर एक बार सच्चे हृदय से कह कर देखो। 

श्री कृपालु महाप्रभु।

 

तेरो सुत मानत सब तेरो, माँ इक काम करा दे मेरो,
मोहे सो ले बनाये निज चेरो, रहिहों ऋणी तोर बहुतेरो........
तेरो सुत मानत सब तेरो, माँ इक काम करा दे मेरो,
 मोहे सो ले बनाये निज चेरो, रहिहों ऋणी तोर बहुतेरो........

 
 

मन! मैं को मत छोड़ तू,दास जोड़ दे और।
मेरा भी रख साथ में,सो रसिकन सिरमौर।।

भावार्थ: हे मन ! तू मैं को मत छोड़। वरन 'मैं' के आगे 'दास' को और जोड़ दे(मैं दास हूँ),'मेरा' भी मत छोड़। वरन 'मेरा' के आगे 'रसिक शेखर श्रीकृष्ण' जोड़ दे। (मेरे स्वामी)।

..........श्री महाराजजी।
मन! मैं को मत छोड़ तू,दास जोड़ दे और।
मेरा भी रख साथ में,सो रसिकन सिरमौर।।

भावार्थ: हे मन ! तू मैं को मत छोड़। वरन 'मैं' के आगे 'दास' को और जोड़ दे(मैं दास हूँ),'मेरा' भी मत छोड़। वरन 'मेरा' के आगे 'रसिक शेखर श्रीकृष्ण' जोड़ दे। (मेरे स्वामी)।

..........श्री महाराजजी।

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...