Wednesday, March 27, 2013

Shri Radha is that Superior most personality for whom Vedas proclaim that they - 'The Vedas' cannot comprehend Her. Her foot dust is adored by the Supreme Lord Shri Krishn. The sovereign divine ladies Uma, Rama and Brahmani are the embodiment of just one power of Shri Radha. We offer millions of obeisances to that Supreme power known as Shri Radha.
Shri Radha is that Superior most personality for whom Vedas proclaim that they - 'The Vedas' cannot comprehend Her. Her foot dust is adored by the Supreme Lord Shri Krishn. The sovereign divine ladies Uma, Rama and Brahmani are the embodiment of just one power of Shri Radha. We offer millions of obeisances to that Supreme power known as Shri Radha.

 

Monday, March 25, 2013

The effort put in by someone to seem and be called nice by others is a major cause of their spiritual downfall.

------------SHRI MAHARAJJI.
The effort put in by someone to seem and be called nice by others is a major cause of their spiritual downfall.
 
------------SHRI MAHARAJJI.


भगवान् के भक्तों की भक्ति से भगवान् जितने शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं , अपनी भक्ति से नहीं।

..........श्री महाराजजी।
भगवान् के भक्तों की भक्ति से भगवान् जितने शीघ्रता से संतुष्ट होते हैं , अपनी भक्ति से नहीं।
 
..........श्री महाराजजी।


सहनशील बनो तथा कभी भी किसी की बात को फील न करो। सदा अपने अंदर झाँको। दूसरा चाहे कुछ भी करे, तुम्हें तो बस अपने से ही मतलब रखना चाहिए। यदि कोई कमाएगा तो भी अपने लिए ,गँवाएगा तो भी अपने लिए ।
------श्री महाराजजी.
सहनशील बनो तथा कभी भी किसी की बात को फील न करो। सदा अपने अंदर झाँको। दूसरा चाहे कुछ भी करे, तुम्हें तो बस अपने से ही मतलब रखना चाहिए। यदि कोई कमाएगा तो भी अपने लिए ,गँवाएगा तो भी अपने लिए ।
------श्री महाराजजी.


गुरु को अपना इष्टदेव , अपनी आत्मा मानो। अर्थात आत्मा से भी आराध्य है गुरु ऐसा मानकर जो उपासना करेगा , उसी को भगवत्प्राप्ति हो सकती है।

...........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।
गुरु को अपना इष्टदेव , अपनी आत्मा मानो। अर्थात आत्मा से भी आराध्य है गुरु ऐसा मानकर जो उपासना करेगा , उसी को भगवत्प्राप्ति हो सकती है।
 
...........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।

 

आँसू बहाने से अन्तःकरण शुद्ध होगा, याद कर लो सब लोग, रट लो ये कृपालु का वाक्य। भोले बालक बनकर रोकर पुकारो, राम दौड़े आयेंगे। सब ज्ञान फेंक दो, कूड़ा-कबाड़ा जो इकट्ठा किया है। अपने को अकिंचन, निर्बल, असहाय, दींन हीन, पापात्मा रेअलाइज करो, भीतर से, तब आँसू की धार चलेगी, तब अन्तःकरण शुद्ध होगा, तब गुरु कृपा करेगा। गुरु की कृपा से राम के दर्शन होंगे, राम का प्यार मिलेगा और सदा के लिये आनन्दमय हो जाओगे।
आँसू बहाने से अन्तःकरण शुद्ध होगा, याद कर लो सब लोग, रट लो ये कृपालु का वाक्य। भोले बालक बनकर रोकर पुकारो, राम दौड़े आयेंगे। सब ज्ञान फेंक दो, कूड़ा-कबाड़ा जो इकट्ठा किया है। अपने को अकिंचन, निर्बल, असहाय, दींन हीन, पापात्मा रेअलाइज करो, भीतर से, तब आँसू की धार चलेगी, तब अन्तःकरण शुद्ध होगा, तब गुरु कृपा करेगा। गुरु की कृपा से राम के दर्शन होंगे, राम का प्यार मिलेगा और सदा के लिये आनन्दमय हो जाओगे।

 

मेरे प्राणाधार हैं, श्री गुरुवर के चरणारविंद।
मेरे प्राणाधार हैं, श्री गुरुवर के चरणारविंद।

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...