Friday, April 5, 2013

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु के श्रीमुख से:-
'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के स्मरण को मरण तक बढ़ाते रहना है। यह एक क्षण का स्मरण जब एक क्षण को भी विस्मृत न हो ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु के श्रीमुख से:-
 'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के स्मरण को मरण तक बढ़ाते रहना है। यह एक क्षण का स्मरण जब एक क्षण को भी विस्मृत न हो ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।

 

    श्री महाराजजी के श्रीमुख से:
    एक बात बड़ी इंपोर्टेंट| हरि, गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट| अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले
    नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।
    श्री महाराजजी के श्रीमुख से:
 एक बात बड़ी इंपोर्टेंट| हरि, गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट| अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।

     

    श्री महाराजजी बताते हैं कि: तीन चीज़ प्रमुख है- 'हरि', 'गुरु' और 'हरि-गुरु' की मिलन वाली पावर, 'भक्ति'। इन तीनों में 'अनन्य' रहो।

     

    Thursday, April 4, 2013

    Although God is Almighty, He has His rule of love, which allows the devotees to come close to Him. God says whichever devotee loves Him to whatever extent, God too will love that devotee to the same extent in the same sentiment.

    .............SHRI MAHARAJJI.
    Although God is Almighty, He has His rule of love, which allows the devotees to come close to Him. God says whichever devotee loves Him to whatever extent, God too will love that devotee to the same extent in the same sentiment. 

.............SHRI MAHARAJJI.

     

      अगर हम ये सदा महसूस करें कि वो(हरि-गुरु) अंदर बैठे हैं और नोट करते हैं, एक अपराध नहीं कर सकता कोई,एक बात गलत नहीं सोच सकता कोई।
      ------प्रभु श्री कृपालुजी महाराज.
      अगर हम ये सदा महसूस करें कि वो(हरि-गुरु) अंदर बैठे हैं और नोट करते हैं, एक अपराध नहीं कर सकता कोई,एक बात गलत नहीं सोच सकता कोई।
 ------प्रभु श्री कृपालुजी महाराज.

       

      त्रिभुवन में सत केवल हरि व हरिभक्त ही हैं, शेष असत हैं।

      ------श्री महाराजजी।
      त्रिभुवन में सत केवल हरि व हरिभक्त ही हैं, शेष असत हैं।

 ------श्री महाराजजी।

       



      जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के अनुसार समस्त वेदों शास्त्रों का सार 'राधा नाम' ही है। श्री राधाकृष्ण नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का निरंतर गुणगान ही उनकी प्रमुख शिक्षा है जो वे सभी साधकों को बताते हैं।
      जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के अनुसार समस्त वेदों शास्त्रों का सार 'राधा नाम' ही है। श्री राधाकृष्ण नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का निरंतर गुणगान ही उनकी प्रमुख शिक्षा है जो वे सभी साधकों को बताते हैं।




      मन का अटैचमेंट किसमें करें?

      एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...