This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, April 6, 2013
'SMARANA' (REMEMBRANCE OF GOD) is the life-force of all devotional practices.it can be compared to the soul,while all other devotional practices can be compared to the body.if the soul leaves the body, of what use is the corpse that remains? Always remeber that if your mind is not absorbed in 'RUPDHYANA', all other spiritual practices amount to nothing.
-----JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHAPRABHU.
-----JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHAPRABHU.
श्री महाराजजी के श्रीमुख से :-
जब तक हम माया के अधीन हैं तब तक क्यों सोचते हो कि मैं प्रशंसा के योग्य हूँ। जब तक तुम शरणागत नहीं हुए तब तक तुम्हें अहंकार किस बात का? किसी भी जीव का वास्तविक स्वरूप श्रीकृष्ण दासत्व ही है। श्रीकृष्ण के दास बन जाओ फिर खूब अहंकार करो। हम छूट देते हैं। लेकिन उस समय तुम अहंकार कर ही नहीं सकते। भगवदप्राप्ति से पहले रहता है अहंकार। अत: सदा सावधान रहो।
जब तक हम माया के अधीन हैं तब तक क्यों सोचते हो कि मैं प्रशंसा के योग्य हूँ। जब तक तुम शरणागत नहीं हुए तब तक तुम्हें अहंकार किस बात का? किसी भी जीव का वास्तविक स्वरूप श्रीकृष्ण दासत्व ही है। श्रीकृष्ण के दास बन जाओ फिर खूब अहंकार करो। हम छूट देते हैं। लेकिन उस समय तुम अहंकार कर ही नहीं सकते। भगवदप्राप्ति से पहले रहता है अहंकार। अत: सदा सावधान रहो।
Friday, April 5, 2013
श्यामसुंदर! संसार में भटकते भटकते थक गया। हे करुणा वरूनालय! तुमने अकारण करुणा के परिणाम स्वरूप मानव देह दिया ,गुरु के द्वारा तत्वज्ञान कराया कि किसी तरह तुम्हारे सन्मुख हो जाऊँ तथा अनंत दिव्यानन्द प्राप्त करके सदा सदा के लिए मेरी दुख निव्रत्ति हो जाये लकीन यह मन इतना हठी है कि तुम्हारे शरणागत नहीं होता।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






