Friday, April 12, 2013

मायाबद्ध जीव का तो गोविन्द राधे !
तनु छुड्वाया जाय कष्ट हो बता दे !!

भावार्थ - मायाबद्ध जीव को शरीर छोड़ते समय असह पीड़ा होती है !
सहस्त्रों बिच्छुओं के एक साथ काटने से जो पीड़ा होती है वही
...
पीड़ा मायाधीन जीव को मृत्यु के समय होती है ! मायाधीन
जीव को शारीर छोड़ने को यमराज विवश करते हैं !

----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज .
मायाबद्ध जीव का तो गोविन्द राधे !
तनु छुड्वाया जाय कष्ट हो बता दे !!

भावार्थ - मायाबद्ध जीव को शरीर छोड़ते समय असह पीड़ा होती है !
सहस्त्रों बिच्छुओं के एक साथ काटने से जो पीड़ा होती है वही 
पीड़ा मायाधीन जीव को मृत्यु के समय होती है ! मायाधीन 
जीव को शारीर छोड़ने को यमराज विवश करते हैं !

----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज .

 
 

अगर आपको पुरा विश्वास है कि भगवान सब के ह्रदय में बैठा है और सर्वान्तर्यामी है और उसको पता है आपको क्या चाहिये तो आप उनसे कुछ मांगोगे ही नहीं.

*****Jagadguru Shri Kripalu ji Maharaj*****
अगर आपको पुरा विश्वास है कि भगवान सब के ह्रदय में बैठा है और सर्वान्तर्यामी है और उसको पता है आपको क्या चाहिये तो आप उनसे कुछ मांगोगे ही नहीं. 

 *****Jagadguru Shri Kripalu ji Maharaj*****


Thursday, April 11, 2013

शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।

शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।

-------श्री कृपालु महाप्रभु।
शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
 पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।

 शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
 जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।

 -------श्री कृपालु महाप्रभु।

 

Paani Mein Meen Pyaasi, Mohi Sun Sun Aave Haasi....

A fish is thirsty in water, when I listen to this I laugh. What an irony? God is sitting within us, He is imbibed in each and every particle and God Himself is bliss, yet we do not feel this bliss because we look for it in the world forgetting our Divine beloved.
Paani Mein Meen Pyaasi, Mohi Sun Sun Aave Haasi....
 
A fish is thirsty in water, when I listen to this I laugh. What an irony? God is sitting within us, He is imbibed in each and every particle and God Himself is bliss, yet we do not feel this bliss because we look for it in the world forgetting our Divine beloved.

 
किसी व्यक्ति को तत्वज्ञान हो जाना और भगवतरूचि बने रहना, प्रभु को पाने की छटपटाहट बनी रहना,यह हजारों जन्मों के प्रयत्न से भी नहीं हो पाता। यही छटपटाहट भगवदप्राप्ति की जड़ है। यह वह चिंगारी है जो भगवदप्रेम रूपी अग्नि को प्रज़्जव्लित करेगी। इसमे निरंतर व्याकुलतापूर्वक स्मरण का तृण पड़ता रहे तो चिंगारी से ज्वाला निकले।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
किसी व्यक्ति को तत्वज्ञान हो जाना और भगवतरूचि बने रहना, प्रभु को पाने की छटपटाहट बनी रहना,यह हजारों जन्मों के प्रयत्न से भी नहीं हो पाता। यही छटपटाहट भगवदप्राप्ति की जड़ है। यह वह चिंगारी है जो भगवदप्रेम रूपी अग्नि को प्रज़्जव्लित करेगी। इसमे निरंतर व्याकुलतापूर्वक स्मरण का तृण पड़ता रहे तो चिंगारी से ज्वाला निकले।
 ------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

 

जग राग छूटे नहीं, कृपा करु राधे,
माया ने सताया अति, कृपा करु राधे |
O Radhey! Please destroy my worldly attachments by showering Your Divine grace upon me. Your Maya has troubled me extensively; please bless me with Your grace.
........SHRI MAHARAJJI.

 

    सावधान ..... यमराज देख रहा है.....

    मानव देह क्षण भंगुर है ,कल आवे न आवे। यमराज हर पल तके हुए है .... टाइम पूरा हुआ नहीं कि...... without Permission बिना बताये ले जायेगा वो।

    जो मायाधीन है , पापात्मा है ...उसे घसीटते हुए ले जायेगा .....दंड देने के लिए ....
    ...

    काल बड़ा बलवान है........इसमें भगवान् भी दखल नहीं देते......... और न संत .....

    हम नहीं याद रखते ...भूल जाते हैं बार बार......इसीलिए ये सब लापरवाही हो रही है सबकी।

    जरा सोचो...अगर अभी छिन गया तो फिर ......?......तो फिर जो स्मरण करते होगे आप ....मृत्यु के समय वैसी ही चित्तवृत्ति रहेगी और मरने के बाद वही गति मिलेगी।

    बस यही सोचते हैं कि ..अभी तो हम दस साल के हैं , बीस साल के , पचास के हैं।

    इसलिए कल कल मत करो ...अभी करो....जल्दी करो......टाइम बीता जा रहा है।

    जो करने के लिए भगवान् ने मानव देह दिया है वो करो।

    ----------- तुम्हारा कृपालु।
    सावधान ..... यमराज देख रहा है..... 

मानव देह क्षण भंगुर है ,कल आवे न आवे। यमराज हर पल तके हुए है .... टाइम पूरा हुआ नहीं कि...... without Permission बिना बताये ले जायेगा वो।
 
जो मायाधीन है , पापात्मा है ...उसे घसीटते हुए ले जायेगा .....दंड देने के लिए ....
 
काल बड़ा बलवान है........इसमें भगवान् भी दखल नहीं देते......... और न संत .....
 
हम नहीं याद रखते ...भूल जाते हैं बार बार......इसीलिए ये सब लापरवाही हो रही है सबकी।
 
जरा सोचो...अगर अभी छिन गया तो फिर ......?......तो फिर जो स्मरण करते होगे आप ....मृत्यु के समय वैसी ही चित्तवृत्ति रहेगी और मरने के बाद वही गति मिलेगी।
 
बस यही सोचते हैं कि ..अभी तो हम दस साल के हैं , बीस साल के , पचास के हैं।
 
इसलिए कल कल मत करो ...अभी करो....जल्दी करो......टाइम बीता जा रहा है।
 
जो करने के लिए भगवान् ने मानव देह दिया है वो करो।
 
----------- तुम्हारा कृपालु।

     

    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...