Friday, April 12, 2013

Break the Privacy and feel that Shyam Sundar is always with me.
अपनी प्राइवेसी को समाप्त करे और यह फील करे कि मेरे इष्टदेव श्याम सुन्दर सदा मेरे साथ है.
~~~Jagadguru Shri Kripalu ji Maharaj~~~
Break the Privacy and feel that Shyam Sundar is always with me.
अपनी प्राइवेसी को समाप्त करे और यह फील करे कि मेरे इष्टदेव श्याम सुन्दर सदा मेरे साथ है.
~~~~~~Jagadguru Shri Kripalu ji Maharaj~~~~~~

 

तुम लोग अपने मन को अपने शरण्य में रखो। परस्पर प्यार से रहो एवं स्वयं में दोष देखो, अपनी-अपनी सेवा करो। यदि मुझे सुख देना चाहते हो तो, सदा अपने मन को राग द्वेष रहित रखो एवं शरण्य से प्यार बढ़ाओ। मैं सदा तुम लोगो को याद करता हूँ, तथा एक-एक क्षण का आइडिया नोट करता हूँ। वेद से लेकर रामायण तक अनंत कोटि-कल्प तक अध्ययन करके देख लो यही पाओगे कि गुरु और भगवान एक ही है अत: गुरु सेवा ही सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य है।
*******जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु********
तुम लोग अपने मन को अपने शरण्य में रखो। परस्पर प्यार से रहो एवं स्वयं में दोष देखो, अपनी-अपनी सेवा करो। यदि मुझे सुख देना चाहते हो तो, सदा अपने मन को राग द्वेष रहित रखो एवं शरण्य से प्यार बढ़ाओ। मैं सदा तुम लोगो को याद करता हूँ, तथा एक-एक क्षण का आइडिया नोट करता हूँ। वेद से लेकर रामायण तक अनंत कोटि-कल्प तक अध्ययन करके देख लो यही पाओगे कि गुरु और भगवान एक ही है अत: गुरु सेवा ही सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य है।
*******जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु********

मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है। भगवान केवल भाव नोट करते हैं, क्रिया नहीं। जो कर्म भगवान में प्रेम उत्पन्न नहीं करता, वह अधर्म ही है। जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान में आसक्त हो वही साधना है।

- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज.
मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है। भगवान केवल भाव नोट करते हैं, क्रिया नहीं। जो कर्म भगवान में प्रेम उत्पन्न नहीं करता, वह अधर्म ही है। जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान में आसक्त हो वही साधना है। 

- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

 

मायाबद्ध जीव का तो गोविन्द राधे !
तनु छुड्वाया जाय कष्ट हो बता दे !!

भावार्थ - मायाबद्ध जीव को शरीर छोड़ते समय असह पीड़ा होती है !
सहस्त्रों बिच्छुओं के एक साथ काटने से जो पीड़ा होती है वही
...
पीड़ा मायाधीन जीव को मृत्यु के समय होती है ! मायाधीन
जीव को शारीर छोड़ने को यमराज विवश करते हैं !

----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज .
मायाबद्ध जीव का तो गोविन्द राधे !
तनु छुड्वाया जाय कष्ट हो बता दे !!

भावार्थ - मायाबद्ध जीव को शरीर छोड़ते समय असह पीड़ा होती है !
सहस्त्रों बिच्छुओं के एक साथ काटने से जो पीड़ा होती है वही 
पीड़ा मायाधीन जीव को मृत्यु के समय होती है ! मायाधीन 
जीव को शारीर छोड़ने को यमराज विवश करते हैं !

----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज .

 
 

अगर आपको पुरा विश्वास है कि भगवान सब के ह्रदय में बैठा है और सर्वान्तर्यामी है और उसको पता है आपको क्या चाहिये तो आप उनसे कुछ मांगोगे ही नहीं.

*****Jagadguru Shri Kripalu ji Maharaj*****
अगर आपको पुरा विश्वास है कि भगवान सब के ह्रदय में बैठा है और सर्वान्तर्यामी है और उसको पता है आपको क्या चाहिये तो आप उनसे कुछ मांगोगे ही नहीं. 

 *****Jagadguru Shri Kripalu ji Maharaj*****


Thursday, April 11, 2013

शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।

शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।

-------श्री कृपालु महाप्रभु।
शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
 पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।

 शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
 जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।

 -------श्री कृपालु महाप्रभु।

 

Paani Mein Meen Pyaasi, Mohi Sun Sun Aave Haasi....

A fish is thirsty in water, when I listen to this I laugh. What an irony? God is sitting within us, He is imbibed in each and every particle and God Himself is bliss, yet we do not feel this bliss because we look for it in the world forgetting our Divine beloved.
Paani Mein Meen Pyaasi, Mohi Sun Sun Aave Haasi....
 
A fish is thirsty in water, when I listen to this I laugh. What an irony? God is sitting within us, He is imbibed in each and every particle and God Himself is bliss, yet we do not feel this bliss because we look for it in the world forgetting our Divine beloved.

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...