"साधक जब तक पूर्ण श्रद्धायुक्त नहीं होगा , वो ज्ञान का ग्रहण नहीं कर सकता। अगर पूर्ण श्रद्धा नहीं है, संशय है तो उसका सर्वनाश सुनिश्चित है। यानि वो संत पर दुर्भावना कर बैठेगा। यह बाबाजी कैसे हैं? कैसे हैं? सोचेगा, जैसा हम चाहते हैं, ऐसा बाबा होना चाहिये। हर आदमी इतना बड़ा मूर्ख है कि वो अपनी राय के अनुसार संत चाहता है।"
This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Wednesday, April 17, 2013
क्या आप लोग एक दिन भी वस्त्र पहनना भूलते हैं घर से बाहर निकलते समय? कभी नहीं भूलते। इसी प्रकार भगवान को भी सदा याद रखना होगा। यदि एक क्षण के लिए भी मन से भूल गए तो पाप करने लगेंगे हम लोग। हर समय, हर स्थान पे ये स्मरण बना रहे मन में कि हरि/गुरु सदा हमारे विचारों को नोट कर रहे हैं। अगर कोई केवल इतना ही कर ले तो भगवत प्राप्ति हो जाये और कोई साधना करने की आवश्यकता ही नहीं है।
~~~~~~~जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~~
~~~~~~~जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~~
Subscribe to:
Posts (Atom)
मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...






