Thursday, April 18, 2013

Sinful minds are purified by meditating on the Lotus Feet of Shri Radha-Krishna.
Sinful minds are purified by meditating on the Lotus Feet of Shri Radha-Krishna.

 

गलत और विपरीत चिन्तन करके साधक स्वयं अपना नुकसान कर लेता है।
------श्री महाराज जी।
गलत और विपरीत चिन्तन करके साधक स्वयं अपना नुकसान कर लेता है।
------श्री महाराज जी।

 



नृप दशरथ घर बजत बधाई।
सकल जगत को मात पिता जो,
सो कौशिल्यहिं मातु बनाई।
यह अचरज सुनि विधि हरि हर सुर,
जय जयकार करत रघुराई।
देही भये विदेह अवध महँ,
पुनि विदेह देही पद पाई।
इंद्रिय मन बुधि भये राममय,
जड़ चेतन नहिँ परत लखाई।
राम कृपालु कृपा ते हौं हूँ,
आजु 'कृपालु' बधाई गाई।
नृप दशरथ घर बजत बधाई।
 सकल जगत को मात पिता जो, 
सो कौशिल्यहिं मातु बनाई।
 यह अचरज सुनि विधि हरि हर सुर,
 जय जयकार करत रघुराई।
 देही भये विदेह अवध महँ,
 पुनि विदेह देही पद पाई। 
इंद्रिय मन बुधि भये राममय,
 जड़ चेतन नहिँ परत लखाई।
 राम कृपालु कृपा ते हौं हूँ,
 आजु 'कृपालु' बधाई गाई।

 

भगवान् को तो शुद्ध मन पसंद है ! अशुद्ध मन से वो प्यार नहीं करते ! समदर्शी बने रहते हैं अर्थात उनके कर्मों का फल दे देते हैं बस ! जैसे मुन्सिफ होता है , इन्साफ करते हैं ! लेकिन गुरु पतितों से प्यार करता है !

*****जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु*****
भगवान् को तो शुद्ध मन पसंद है ! अशुद्ध मन से वो प्यार नहीं करते ! समदर्शी बने रहते हैं अर्थात उनके कर्मों का फल दे देते हैं बस ! जैसे मुन्सिफ होता है , इन्साफ करते हैं ! लेकिन गुरु पतितों से प्यार करता है !

*****जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु*****

 

अशांति तो अविवेकी का विषय है उसे पास न फटकने दो चाहे जैसी परिस्थिति हो।
----श्री महाराज जी।
अशांति तो अविवेकी का विषय है उसे पास न फटकने दो चाहे जैसी परिस्थिति हो।
----श्री महाराज जी।

 

"By each passing day, Our bodies are being dragged to graves but our minds are carried by illusions...may we change.."
"By each passing day, Our bodies are being dragged to graves but our minds are carried by illusions...may we change.."

 

    गलती प्रत्येक व्यक्ति करता है , अतः सबसे नम्रता एवं दीनता का व्यवहार करो, सबको अपने से बड़ा मानो।
    -----श्री महाराज जी।
    गलती प्रत्येक व्यक्ति करता है , अतः सबसे नम्रता एवं दीनता का व्यवहार करो, सबको अपने से बड़ा मानो।
-----श्री महाराज जी।

     

    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...