This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, April 22, 2013
सावधान ..... यमराज देख रहा है.....
मानव देह क्षण भंगुर है ,कल आवे न आवे। यमराज हर पल तके हुए है .... टाइम पूरा हुआ नहीं कि...... without Permission बिना बताये ले जायेगा वो।
जो मायाधीन है , पापात्मा है ...उसे घसीटते हुए ले जायेगा .....दंड देने के लिए ....
...
काल बड़ा बलवान है........इसमें भगवान् भी दखल नहीं देते......... और न संत .....
हम नहीं याद रखते ...भूल जाते हैं बार बार......इसीलिए ये सब लापरवाही हो रही है सबकी।
जरा सोचो...अगर अभी छिन गया तो फिर ......?......तो फिर जो स्मरण करते होगे आप ....मृत्यु के समय वैसी ही चित्तवृत्ति रहेगी और मरने के बाद वही गति मिलेगी।
बस यही सोचते हैं कि ..अभी तो हम दस साल के हैं , बीस साल के , पचास के हैं।
इसलिए कल कल मत करो ...अभी करो....जल्दी करो......टाइम बीता जा रहा है।
जो करने के लिए भगवान् ने मानव देह दिया है वो करो।
----------- तुम्हारा कृपालु।
मानव देह क्षण भंगुर है ,कल आवे न आवे। यमराज हर पल तके हुए है .... टाइम पूरा हुआ नहीं कि...... without Permission बिना बताये ले जायेगा वो।
जो मायाधीन है , पापात्मा है ...उसे घसीटते हुए ले जायेगा .....दंड देने के लिए ....
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काल बड़ा बलवान है........इसमें भगवान् भी दखल नहीं देते......... और न संत .....
हम नहीं याद रखते ...भूल जाते हैं बार बार......इसीलिए ये सब लापरवाही हो रही है सबकी।
जरा सोचो...अगर अभी छिन गया तो फिर ......?......तो फिर जो स्मरण करते होगे आप ....मृत्यु के समय वैसी ही चित्तवृत्ति रहेगी और मरने के बाद वही गति मिलेगी।
बस यही सोचते हैं कि ..अभी तो हम दस साल के हैं , बीस साल के , पचास के हैं।
इसलिए कल कल मत करो ...अभी करो....जल्दी करो......टाइम बीता जा रहा है।
जो करने के लिए भगवान् ने मानव देह दिया है वो करो।
----------- तुम्हारा कृपालु।
कुछ लोग कहते हैं कि घड़ी अपने आप चलती है ऐसे ही सृष्टि भी अपने आप हो जायगी, किन्तु उन्हें सोचना चाहिये कि घड़ी पूर्व में नहीं चलती थी जब किसी ने उसे बनाया तब चलने लगी एवं पश्चात् भी नहीं चलेगी अर्थात् नष्ट हो जायगी, तब फिर बनानी पड़ेगी। इसके अतिरिक्त यह भी विचारणीय है कि घड़ी बनाने वाले ने घड़ी तो बनायी है किन्तु उस घड़ी के लौह परमाणुओं की क्रिया को घड़ी साज नहीं जानता अर्थात् उस पर कन्ट्रोल नहीं कर सकता। उसे कन्ट्रोल करने वाला ईश्वर है। अतएव ईश्वर को सर्वव्यापक होना पड़ता है अन्यथा वे परमाणु ठीक रूप से काम नहीं कर सकते।
प्रेम रस सिद्धान्त,
रचयिता- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
संस्करण 2010, अध्याय 1: जीव का चरम लक्ष्य, पृ. 17
प्रेम रस सिद्धान्त,
रचयिता- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
संस्करण 2010, अध्याय 1: जीव का चरम लक्ष्य, पृ. 17
पहले नदी पार हो जाओ ,तब नाव को चैलेंज करो। अगर 10 फीट भी अभी नदी पार करना शेष है ,जहाँ अगाध पानी है सिर के ऊपर और आपने कहा - अब क्या है, कूद पड़ो। न, न अभी ख़तरा है, संकट अभी टला नहीं है। नामापराध यानि संत के प्रति अपराध कर देने पर ,भावभक्ति पर जाकर (जब भगवतदर्शन होने वाला होता है) वह उच्च कोटि का साधक भी अभाव भक्ति यानि भक्ति में शून्यता को प्राप्त हो जाता है, साधारण जीव की क्या हैसियत?
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
You are asleep in a illusionary trance created by our own mind . You are approaching death everyday and yet you cheerfully celebrate your Birthday. You do not realize that each day which is passing by is not a joyful moment, but a matter of regret, that so much time has passed away and very little remains. So without further delay and realising that this body is temporary, you should start doing 'Sadhana' from this moment.
-------- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
-------- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






