Monday, April 22, 2013

जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज हमें समझाते हैं -

**अकेले में सोचो, कमरा बंद करके. जब तक माया के अंडर में है जीव तब तक कौन सी खराबी उसमे नहीं है. कामनाएं नहीं है, कि क्रोध नहीं है, कि लोभ नहीं है, कि मोह नहीं है.. कौन सा दोष नहीं है. अनंत दोष भरे हैं उसमे से एक दोष कोई कह दे, तो क्यों फीलिंग होती है? अपना सर्वनाश क्यों करता है साधक? क्योकि फील करोगे तो मन गन्दा होगा. उससे हानि होगी शरीर को भी. क्रोध से. ये साइंस कहती है. तुम आत्मा हो...**

-जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज.
जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज हमें समझाते हैं -
 
**अकेले में सोचो, कमरा बंद करके. जब तक माया के अंडर में है जीव तब तक कौन सी खराबी उसमे नहीं है. कामनाएं नहीं है, कि क्रोध नहीं है, कि लोभ नहीं है, कि मोह नहीं है.. कौन सा दोष नहीं है. अनंत दोष भरे हैं उसमे से एक दोष कोई कह दे, तो क्यों फीलिंग होती है? अपना सर्वनाश क्यों करता है साधक? क्योकि फील करोगे तो मन गन्दा होगा. उससे हानि होगी शरीर को भी. क्रोध से. ये साइंस कहती है. तुम आत्मा हो...**
 
-जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज.

 

जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान् में आसक्त हो वही साधना है।

...........श्री महाराज जी।
जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान् में आसक्त हो वही साधना है।

 ...........श्री महाराज जी।

 

Practice to feel the presence of Shri Maharaj Ji everywhere and all the time.
Practice to feel the presence of Shri Maharaj Ji everywhere and all the time.

 

सावधान ..... यमराज देख रहा है.....

मानव देह क्षण भंगुर है ,कल आवे न आवे। यमराज हर पल तके हुए है .... टाइम पूरा हुआ नहीं कि...... without Permission बिना बताये ले जायेगा वो।

जो मायाधीन है , पापात्मा है ...उसे घसीटते हुए ले जायेगा .....दंड देने के लिए ....
...
काल बड़ा बलवान है........इसमें भगवान् भी दखल नहीं देते......... और न संत .....

हम नहीं याद रखते ...भूल जाते हैं बार बार......इसीलिए ये सब लापरवाही हो रही है सबकी।

जरा सोचो...अगर अभी छिन गया तो फिर ......?......तो फिर जो स्मरण करते होगे आप ....मृत्यु के समय वैसी ही चित्तवृत्ति रहेगी और मरने के बाद वही गति मिलेगी।

बस यही सोचते हैं कि ..अभी तो हम दस साल के हैं , बीस साल के , पचास के हैं।

इसलिए कल कल मत करो ...अभी करो....जल्दी करो......टाइम बीता जा रहा है।

जो करने के लिए भगवान् ने मानव देह दिया है वो करो।

----------- तुम्हारा कृपालु।
सावधान ..... यमराज देख रहा है..... 

मानव देह क्षण भंगुर है ,कल आवे न आवे। यमराज हर पल तके हुए है .... टाइम पूरा हुआ नहीं कि...... without Permission बिना बताये ले जायेगा वो।
 
जो मायाधीन है , पापात्मा है ...उसे घसीटते हुए ले जायेगा .....दंड देने के लिए ....
 
काल बड़ा बलवान है........इसमें भगवान् भी दखल नहीं देते......... और न संत .....
 
हम नहीं याद रखते ...भूल जाते हैं बार बार......इसीलिए ये सब लापरवाही हो रही है सबकी।
 
जरा सोचो...अगर अभी छिन गया तो फिर ......?......तो फिर जो स्मरण करते होगे आप ....मृत्यु के समय वैसी ही चित्तवृत्ति रहेगी और मरने के बाद वही गति मिलेगी।
 
बस यही सोचते हैं कि ..अभी तो हम दस साल के हैं , बीस साल के , पचास के हैं।
 
इसलिए कल कल मत करो ...अभी करो....जल्दी करो......टाइम बीता जा रहा है।
 
जो करने के लिए भगवान् ने मानव देह दिया है वो करो।
 
----------- तुम्हारा कृपालु।

 
 

कुछ लोग कहते हैं कि घड़ी अपने आप चलती है ऐसे ही सृष्टि भी अपने आप हो जायगी, किन्तु उन्हें सोचना चाहिये कि घड़ी पूर्व में नहीं चलती थी जब किसी ने उसे बनाया तब चलने लगी एवं पश्चात् भी नहीं चलेगी अर्थात् नष्ट हो जायगी, तब फिर बनानी पड़ेगी। इसके अतिरिक्त यह भी विचारणीय है कि घड़ी बनाने वाले ने घड़ी तो बनायी है किन्तु उस घड़ी के लौह परमाणुओं की क्रिया को घड़ी साज नहीं जानता अर्थात् उस पर कन्ट्रोल नहीं कर सकता। उसे कन्ट्रोल करने वाला ईश्वर है। अतएव ईश्वर को सर्वव्यापक होना पड़ता है अन्यथा वे परमाणु ठीक रूप से काम नहीं कर सकते।

प्रेम रस सिद्धान्त,
रचयिता- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
संस्करण 2010, अध्याय 1: जीव का चरम लक्ष्य, पृ. 17
कुछ लोग कहते हैं कि घड़ी अपने आप चलती है ऐसे ही सृष्टि भी अपने आप हो जायगी, किन्तु उन्हें सोचना चाहिये कि घड़ी पूर्व में नहीं चलती थी जब किसी ने उसे बनाया तब चलने लगी एवं पश्चात् भी नहीं चलेगी अर्थात् नष्ट हो जायगी, तब फिर बनानी पड़ेगी। इसके अतिरिक्त यह भी विचारणीय है कि घड़ी बनाने वाले ने घड़ी तो बनायी है किन्तु उस घड़ी के लौह परमाणुओं की क्रिया को घड़ी साज नहीं जानता अर्थात् उस पर कन्ट्रोल नहीं कर सकता। उसे कन्ट्रोल करने वाला ईश्वर है। अतएव ईश्वर को सर्वव्यापक होना पड़ता है अन्यथा वे परमाणु ठीक रूप से काम नहीं कर सकते।


प्रेम रस सिद्धान्त,
रचयिता- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
संस्करण 2010, अध्याय 1: जीव का चरम लक्ष्य, पृ. 17

 

श्री महाराजजी बताते हैं कि: तीन चीज़ प्रमुख है- 'हरि', 'गुरु' और 'हरि-गुरु' की मिलन वाली पावर, 'भक्ति'। इन तीनों में 'अनन्य' रहो।
श्री महाराजजी बताते हैं कि: तीन चीज़ प्रमुख है- 'हरि', 'गुरु' और 'हरि-गुरु' की मिलन वाली पावर, 'भक्ति'। इन तीनों में 'अनन्य' रहो।

 

पहले नदी पार हो जाओ ,तब नाव को चैलेंज करो। अगर 10 फीट भी अभी नदी पार करना शेष है ,जहाँ अगाध पानी है सिर के ऊपर और आपने कहा - अब क्या है, कूद पड़ो। न, न अभी ख़तरा है, संकट अभी टला नहीं है। नामापराध यानि संत के प्रति अपराध कर देने पर ,भावभक्ति पर जाकर (जब भगवतदर्शन होने वाला होता है) वह उच्च कोटि का साधक भी अभाव भक्ति यानि भक्ति में शून्यता को प्राप्त हो जाता है, साधारण जीव की क्या हैसियत?
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
पहले नदी पार हो जाओ ,तब नाव को चैलेंज करो। अगर 10 फीट भी अभी नदी पार करना शेष है ,जहाँ अगाध पानी है सिर के ऊपर और आपने कहा - अब क्या है, कूद पड़ो। न, न अभी ख़तरा है, संकट अभी टला नहीं है। नामापराध यानि संत के प्रति अपराध कर देने पर ,भावभक्ति पर जाकर (जब भगवतदर्शन होने वाला होता है) वह उच्च कोटि का साधक भी अभाव भक्ति यानि भक्ति में शून्यता को प्राप्त हो जाता है, साधारण जीव की क्या हैसियत?
 -------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...