This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Thursday, April 25, 2013
हम भगवान् के आगे , उनको सामने खड़ा करके , रोकर उनका दर्शन , उनका प्रेम माँगे। रोकर माँगे ,अकड़ कर नहीं, जैसे कोई पानी में डूबने लगता है तो वो कितनी विहलता , व्याकुलता में हाथ- पैर ऊपर करता है, तैरना नहीं जानता है। जैसे मछली को बाहर दाल दो , कैसे तड़पती है, पानी के लिये। ऐसे ही श्यामसुन्दर के मिलन के लिये हमको तड़पना होगा।
बिनु रोये किन पाइयां प्रेम पियरो मीत।
******जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु******
बिनु रोये किन पाइयां प्रेम पियरो मीत।
******जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु******
ऐसे टाइम बिता जा रहा हे 30 साल के हो गये ,50 साल के हो गये , हा बिता जा रहा हे ,आगे नहीं बढ़ पा रहे हे , 1 दिन फट यमराज का आर्डर हो जायेगा.
आयु जल बुलबुला गोविंद राधे,
जाने कब फूट जाये सबको बता दे.
... जब यम कालदंड, लै अइहै , देखि देखि डर पायेगा.
तब "कृपालु" धरि हाथ माथ पर, मन ही मन पछतायेगा.
- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
आयु जल बुलबुला गोविंद राधे,
जाने कब फूट जाये सबको बता दे.
... जब यम कालदंड, लै अइहै , देखि देखि डर पायेगा.
तब "कृपालु" धरि हाथ माथ पर, मन ही मन पछतायेगा.
- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
संसार ही भगवद्विषयक प्रवृति का प्रथम गुरु है, जो असक्त जीव को जूते मार मार कर संसार के प्रति वैराग्य जाग्रत करवा देता है.
The Material World acts as the first Guru for the Soul entangled in worldly desires because by inflicting miseries on him, it helps him develop detachment from the world.
- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
The Material World acts as the first Guru for the Soul entangled in worldly desires because by inflicting miseries on him, it helps him develop detachment from the world.
- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






