Saturday, April 27, 2013

यदि दैन्यं त्वत्कृपाहेतुर्न तदस्ति ममाण्वपि ।
तां कृपां कुरु राधेश ययाते दैन्य माप्नुयाम् ॥

अर्थात् ' हे श्रीकृष्ण ! यदि दीनता से ही तुम कृपा करते हो तो वह मेरे पास थोडा भी नहीं है । अतः पहले ऐसी कृपा करो कि दीन भाव युक्त बनुँ । ' ऐसा कहकर आँसू बहाओ । यह करना पडेगा । मानव देह क्ष्यणिक है । जल्दि करो, पता नहीं कब टिकट कट जाय ॥

------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
यदि दैन्यं त्वत्कृपाहेतुर्न तदस्ति ममाण्वपि ।
तां कृपां कुरु राधेश ययाते दैन्य माप्नुयाम् ॥

अर्थात् ' हे श्रीकृष्ण ! यदि दीनता से ही तुम कृपा करते हो तो वह मेरे पास थोडा भी नहीं है । अतः पहले ऐसी कृपा करो कि दीन भाव युक्त बनुँ । ' ऐसा कहकर आँसू बहाओ । यह करना पडेगा । मानव देह क्ष्यणिक है । जल्दि करो, पता नहीं कब टिकट कट जाय ॥

-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

 
 

If we find our mind repeatedly going towards & dwelling upon others faults, we should know that our ego has swollen, and we must be careful.

- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
If we find our mind repeatedly going towards & dwelling upon others  faults, we should know that our ego  has swollen, and we must be careful.

- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj

 

Thursday, April 25, 2013

"JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ HAS REJUVENATED AND RE-ESTABLISHED THE DEVOTIONAL PARAMPARA OF RAGANUGA BHAKTI WHICH WAS INTRODUCED BY SHREE CHAITANYA MAHAPRABHUJI,AND HAS GIVEN IT A REFINED FORM THAT COULD BE FOLLOWED BY THE DEVOTEES OF THE WORLD,FOREVER.
FOR THE GOOD OF THE SOULS,SHRI MAHARAJJI HAS REVEALED A RECONCILED AND UNIFIED THEORY OF ALL THE BHARTIYA SCRIPTURES WHICH HAS PROPOUNDED BY PREVIOUS JAGADGURUS AND ACHARYAS IN VARIOUS WAYS,AND HAS ESTABLISHED A SINGLE,SURE,SIMPLE,AND POTENT PATH OF DEVOTION TO GOD THAT COULD BE FOLLOWED BY EVERYONE DESIRING TO EXPERIENCE THE SUPREME FORM OF DIVINE LOVE."

 

    मन कि निर्मलता कि कसौटी है – भगवत विषय में मन का लगाव. यह कसौटी श्रेष्ठ हैं। इश्वरीय तत्व को पाने के लिये हमारे मन मे कितनी छ्टपटाहट है, यहि मन की निर्मलता कि सबसे बडी कसौटी है।
    -------श्री महाराजजी।
    मन कि निर्मलता कि कसौटी है – भगवत विषय में मन का लगाव. यह कसौटी श्रेष्ठ हैं। इश्वरीय तत्व को पाने के लिये हमारे मन मे कितनी छ्टपटाहट है, यहि मन की निर्मलता कि सबसे बडी कसौटी है। 
-------श्री महाराजजी।

     

    श्री राधे हमारी सरकार, फ़िकिर मोहिं काहे की ।

    हित अधम उधारन देह धरेँ, बिनु कारन दीनन नेह करेँ ;

    जब ऐसी दया दरबार , फ़िकिर मोहिं काहे की ।

    ...........श्री महाराजजी।
    श्री राधे हमारी सरकार, फ़िकिर मोहिं काहे की ।

 हित अधम उधारन देह धरेँ, बिनु कारन दीनन नेह करेँ ;

 जब ऐसी दया दरबार , फ़िकिर मोहिं काहे की ।
 
...........श्री महाराजजी।

     

    श्री कृपालु जी महाराज के मुखारविंद से:-

    जो आदेश मैंने तुमको दिया है: दीनता, मधुरभाषण, नम्रता , उनका पालन तुम लोग अभी नहीं कर रहे हो। एक भिक्षा माँग रहा हूँ, तुम लोग लापरवाही कर रहे हो, यह बुरी बात है।
    श्री कृपालु जी महाराज के मुखारविंद से:-
 
जो आदेश मैंने तुमको दिया है: दीनता, मधुरभाषण, नम्रता , उनका पालन तुम लोग अभी नहीं कर रहे हो। एक भिक्षा माँग रहा हूँ, तुम लोग लापरवाही कर रहे हो, यह बुरी बात है।

     

    It is Thakurji's (Shree Krishna's) weakness that the moment He hears someone singing Kishoriji's (Radharani's) name, He runs towards the one singing Her names! To please and make Shree Krishna happy, just chant the Divine name and glories of Radharani. This is the fastest method of pleasing your beloved Shree Krishna.
    It is Thakurji's (Shree Krishna's) weakness that the moment He hears someone singing Kishoriji's (Radharani's) name, He runs towards the one singing Her names! To please and make Shree Krishna happy, just chant the Divine name and glories of Radharani. This is the fastest method of pleasing your beloved Shree Krishna.


    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...