This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, May 4, 2013
भगवान्
और संत ये दो पर्सनैलिटी (personality ) ऐसी हैं जो शरीर से अलग हुए तो
दिखायी पड़ते हैं। एक्टिंग ( acting ) में किसी को छोड़कर जीवन भर को
वियोगी बना सकते हैं लेकिन अन्दर से कभी भी अलग नहीं हो सकते। हमारा शरीर
नहीं रहता तब भी वह रहते हैं। नरक में भी वे हमारे साथ रहते हैं और बैकुण्ठ
में भी हमारे साथ रहते हैं। वे हमारा साथ छोड़ देंगे , ऐसा कभी समझना ही
नहीं चाहिए। समझना हीं नहीं - अनुभव करना चाहिए।
~~~~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~
~~~~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~
श्री
महाराज जी अपने सम्पूर्ण साहित्य एवं प्रवचन द्वारा पुनः पुनः यही
सिद्धान्त जीवों के मस्तिष्क में भर रहे हैं। उनके मतानुसार ब्रहम जीव माया
तीन तत्व सनातन हैं , किन्तु जीव एवं माया दोनों ही ब्रहम की शक्ति हैं।
ब्रहम श्री राधाकृष्ण का दिव्य प्रेम प्राप्त करना साध्य एवं उनकी ही
निष्काम भक्ति करना ही साधना है।
वे
क्या हैं ? हम नहीं जान सकते हैं। यह तो केवल वही जान सकता है जिस पर वो
कृपा करके बोध करा देते हैं। केवल इतना ही द्रढ़ विश्वास बनाये रखो कि वे
ही हमारे सर्वस्व हैं। सर्वसमर्थ हैं , सर्वान्तर्यामी हैं और इतना ही नहीं
वे तो हमारे बिल्कुल अपने हैं और सदा से हम पर अकारण कृपा करते आये हैं।
~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महरज~~~~
~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महरज~~~~
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