Saturday, May 4, 2013

वास्तविक गुरु के निरंतर सत्संग से ही जीव संसार से विमुख होकर श्रीकृष्ण भक्ति करेगा।
-----श्री कृपालु जी महाप्रभु।
वास्तविक गुरु के निरंतर सत्संग से ही जीव संसार से विमुख होकर श्रीकृष्ण भक्ति करेगा।
-----श्री कृपालु जी महाप्रभु।
भगवान् और संत ये दो पर्सनैलिटी (personality ) ऐसी हैं जो शरीर से अलग हुए तो दिखायी पड़ते हैं। एक्टिंग ( acting ) में किसी को छोड़कर जीवन भर को वियोगी बना सकते हैं लेकिन अन्दर से कभी भी अलग नहीं हो सकते। हमारा शरीर नहीं रहता तब भी वह रहते हैं। नरक में भी वे हमारे साथ रहते हैं और बैकुण्ठ में भी हमारे साथ रहते हैं। वे हमारा साथ छोड़ देंगे , ऐसा कभी समझना ही नहीं चाहिए। समझना हीं नहीं - अनुभव करना चाहिए।
~~~~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~
भगवान् और संत ये दो पर्सनैलिटी (personality ) ऐसी हैं जो शरीर से अलग हुए तो दिखायी पड़ते हैं। एक्टिंग ( acting ) में किसी को छोड़कर जीवन भर को वियोगी बना सकते हैं लेकिन अन्दर से कभी भी अलग  नहीं हो सकते। हमारा शरीर नहीं रहता तब भी वह रहते हैं। नरक में भी वे हमारे साथ रहते हैं और बैकुण्ठ में भी हमारे साथ रहते हैं। वे हमारा साथ छोड़ देंगे , ऐसा कभी समझना ही नहीं चाहिए। समझना हीं नहीं - अनुभव करना चाहिए।
~~~~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~
इक नज़र उनको देखा...... गजब हो गया ।
इक नज़र उनको देखा...... गजब हो गया ।
श्री महाराज जी अपने सम्पूर्ण साहित्य एवं प्रवचन द्वारा पुनः पुनः यही सिद्धान्त जीवों के मस्तिष्क में भर रहे हैं। उनके मतानुसार ब्रहम जीव माया तीन तत्व सनातन हैं , किन्तु जीव एवं माया दोनों ही ब्रहम की शक्ति हैं। ब्रहम श्री राधाकृष्ण का दिव्य प्रेम प्राप्त करना साध्य एवं उनकी ही निष्काम भक्ति करना ही साधना है।
श्री महाराज जी अपने सम्पूर्ण साहित्य  एवं प्रवचन द्वारा पुनः पुनः यही सिद्धान्त जीवों के मस्तिष्क में भर रहे हैं। उनके मतानुसार ब्रहम जीव माया तीन तत्व सनातन हैं , किन्तु जीव एवं माया दोनों ही ब्रहम की शक्ति हैं। ब्रहम श्री राधाकृष्ण का दिव्य प्रेम प्राप्त करना साध्य एवं उनकी ही निष्काम भक्ति करना ही साधना है।
वे क्या हैं ? हम नहीं जान सकते हैं। यह तो केवल वही जान सकता है जिस पर वो कृपा करके बोध करा देते हैं। केवल इतना ही द्रढ़ विश्वास बनाये रखो कि वे ही हमारे सर्वस्व हैं। सर्वसमर्थ हैं , सर्वान्तर्यामी हैं और इतना ही नहीं वे तो हमारे बिल्कुल अपने हैं और सदा से हम पर अकारण कृपा करते आये हैं।
~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महरज~~~~

The world is constituted of the five material elements and so is the physical body. Therefore, the material world is for the sustenance of the material body.

-------JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
The world is constituted of the five material elements and so is the physical body. Therefore, the material world is for the sustenance of the material body.

-------JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
यदि ह्रदय में कूड़ा -कबाड़ा संसार बैठ गया तो गुरु को कहाँ बैठायेंगे ?
----श्री महाराज जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...