Wednesday, May 8, 2013

There are 3 eternal entities: God, the souls, and Maya. They have no beginning and they will have no end. They have always been in existence and they will always remain in existence.
------jagadguru shri kripalu mahaprabhu.

 There are 3 eternal entities: God, the souls, and Maya. They have no beginning and they will have no end. They have always been in existence and they will always remain in existence.
------jagadguru shri kripalu mahaprabhu.




अपने को दीन, पतित, अधम मानो वरना जीवन भर की कमाई खो जायेगी।
~~~~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~
अपने को दीन, पतित, अधम मानो वरना जीवन भर की कमाई खो जायेगी।
~~~~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~


 


श्री महाराज जी अपने सम्पूर्ण साहित्य एवं प्रवचन द्वारा पुनः पुनः यही सिद्धान्त जीवों के मस्तिष्क में भर रहे हैं। उनके मतानुसार ब्रहम जीव माया तीन तत्व सनातन हैं , किन्तु जीव एवं माया दोनों ही ब्रहम की शक्ति हैं। ब्रहम श्री राधाकृष्ण का दिव्य प्रेम प्राप्त करना साध्य एवं उनकी ही निष्काम भक्ति करना ही साधना है।
श्री महाराज जी अपने सम्पूर्ण साहित्य  एवं प्रवचन द्वारा पुनः पुनः यही सिद्धान्त जीवों के मस्तिष्क में भर रहे हैं। उनके मतानुसार ब्रहम जीव माया तीन तत्व सनातन हैं , किन्तु जीव एवं माया दोनों ही ब्रहम की शक्ति हैं। ब्रहम श्री राधाकृष्ण का दिव्य प्रेम प्राप्त करना साध्य एवं उनकी ही निष्काम भक्ति करना ही साधना है।



है यह ' कृपालु '.नारा बस एक तू हमारा ।


 


Amongst different types of devotional practices, three are the main: shravan (listening), kirtan (chanting) and smaran (remembrance).
-------jagadguru shri kripalu ji maharaj.
Amongst different types of devotional practices, three are the main: shravan (listening), kirtan (chanting) and smaran (remembrance).
-------jagadguru shri kripalu ji maharaj.


 


It is only by the grace of God that you can attain Supreme Peace.
ईश्वर की कृपा से परमशान्ति को प्राप्त कर सकते हो।
-----shri maharaj ji.
It is only by the grace of God that you can attain Supreme Peace.
ईश्वर की कृपा से परमशान्ति को प्राप्त कर सकते हो।
-----shri maharaj ji.



    साधक ने अपनी बुद्धि को जब महापुरुष एवं भगवान् के ही हाथ बेचा है , तब उसे अपनी बुद्धि को महापुरुष के आदेश से ही सम्बद्ध रखना चाहिये। लोक में भी देखो , एक कूपमण्डूक अत्यन्त मूर्ख ग्रामीण भी , अपने मुकदमे में किसी व्युत्पन्न वकील के द्वारा प्रमुख कानूनी विषयों को अपनी बुद्धि में रखकर धुरन्धर वकील की जिरह में भी नहीं उखड़ता।
    ****** श्री महाराज जी .


     


    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...