Wednesday, May 15, 2013

श्री राधे हमारी सरकार, फ़िकिर मोहिं काहे की ।

हित अधम उधारन देह धरेँ, बिनु कारन दीनन नेह करेँ ;

जब ऐसी दया दरबार , फ़िकिर मोहिं काहे की ।

...........श्री महाराजजी।
श्री राधे हमारी सरकार, फ़िकिर मोहिं काहे की ।

 हित अधम उधारन देह धरेँ, बिनु कारन दीनन नेह करेँ ;

 जब ऐसी दया दरबार , फ़िकिर मोहिं काहे की ।
 
...........श्री महाराजजी।


 

श्री कृपालु जी महाराज के मुखारविंद से:-

जो आदेश मैंने तुमको दिया है: दीनता, मधुरभाषण, नम्रता , उनका पालन तुम लोग अभी नहीं कर रहे हो। एक भिक्षा माँग रहा हूँ, तुम लोग लापरवाही कर रहे हो, यह बुरी बात है।
श्री कृपालु जी महाराज के मुखारविंद से:-
 
जो आदेश मैंने तुमको दिया है: दीनता, मधुरभाषण, नम्रता , उनका पालन तुम लोग अभी नहीं कर रहे हो। एक भिक्षा माँग रहा हूँ, तुम लोग लापरवाही कर रहे हो, यह बुरी बात है।



    न गुरु न चेला,कृपालु फिरे अकेला !
    न गुरु न चेला,कृपालु फिरे अकेला !



    MY MAHARAJJI(JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ) IS THE EMBODIMENT OF GRACE.GRACE OUTSIDE,GRACE INSIDE,GRACE AND ONLY GRACE.
    HE IS 'KRIPALU'!
    MY MAHARAJJI(JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ) IS THE EMBODIMENT OF GRACE.GRACE OUTSIDE,GRACE INSIDE,GRACE AND ONLY GRACE.
 HE IS 'KRIPALU'!


     


    True surrender is to join your mind with the Divine Spiritual Master by obeying his instructions without any questions or hesitation.
    -----SHRI MAHARAJJI.



    भगवान 'चित्त' चाहता है, संसार 'वित्त' चाहता है।

    God ONLY wants your mind (Love) and World ONLY wants your money.
    भगवान 'चित्त' चाहता है, संसार 'वित्त' चाहता है।

God ONLY wants your mind (Love) and World ONLY wants your money.


     


    Only 'Radha Krishn' are my everything, this feeling has to be strengthened in the mind.
    --------SHRI MAHARAJJI.
    Only 'Radha Krishn' are my everything, this feeling has to be strengthened in the mind.
--------SHRI MAHARAJJI.


     


    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...