Tuesday, May 28, 2013

हमारे पास से जब आप संसार में जाते हैं तो बिल्कुल बदल जाते हैं। कुछ तो काम अधिक हो जाता है और कुछ लापरवाही अधिक होती है। काम करते समय भी हरि गुरु को नहीं भूलना चाहिए। इसका अभ्यास करना चाहिए। अगर हरि गुरु को सदा साथ रियलाईज़ करते रहें तो फिर काम , क्रोध ,लोभ , मोह , ये जो शत्रु हैं , नाश करते हैं हमारी साधना का , फिर ये नहीं आते।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हमारे पास से जब आप संसार में जाते हैं तो बिल्कुल बदल जाते हैं। कुछ तो काम अधिक हो जाता है और कुछ लापरवाही अधिक होती है। काम करते समय भी हरि  गुरु को नहीं भूलना चाहिए। इसका अभ्यास करना चाहिए। अगर हरि गुरु को सदा साथ रियलाईज़ करते रहें तो फिर काम , क्रोध ,लोभ , मोह , ये जो शत्रु हैं , नाश करते हैं हमारी साधना का , फिर ये नहीं आते।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।



हम लोग अपने स्वार्थ की द्रष्टि से गुरु तत्व को भगवान् से बड़ा मानते हैं। है नहीं , मानते हैं। क्योंकि भगवान् संबंधी समस्त वेद - ज्ञान गुरु देगा। मार्ग की बाधाओं को दूर करायेगा। अंतःकरण की शुद्धि पर प्रेमदान वही करेगा।
------श्री महाराज जी।
हम लोग अपने स्वार्थ की द्रष्टि से गुरु तत्व को भगवान् से बड़ा मानते हैं। है नहीं , मानते हैं। क्योंकि भगवान् संबंधी समस्त वेद - ज्ञान गुरु  देगा। मार्ग  की बाधाओं को दूर करायेगा। अंतःकरण की शुद्धि पर प्रेमदान वही करेगा।
------श्री महाराज जी।


 

हम लोग अपने स्वार्थ की द्रष्टि से गुरु तत्व को भगवान् से बड़ा मानते हैं। है नहीं , मानते हैं। क्योंकि भगवान् संबंधी समस्त वेद - ज्ञान गुरु देगा। मार्ग की बाधाओं को दूर करायेगा। अंतःकरण की शुद्धि पर प्रेमदान वही करेगा।
------श्री महाराज जी।
हम लोग अपने स्वार्थ की द्रष्टि से गुरु तत्व को भगवान् से बड़ा मानते हैं। है नहीं , मानते हैं। क्योंकि भगवान् संबंधी समस्त वेद - ज्ञान गुरु  देगा। मार्ग  की बाधाओं को दूर करायेगा। अंतःकरण की शुद्धि पर प्रेमदान वही करेगा।
------श्री महाराज जी।



Friday, May 24, 2013

जिस क्षण हम सेंट-परसेंट मान लेंगे कि केवल हरि-गुरु ही हमारे प्राण हैं,तत्क्षण भगवतप्राप्ति हो जायेगी,आगे कुछ करना-धरना नहीं है।
........श्री महाराजजी।
जिस क्षण हम सेंट-परसेंट मान लेंगे कि केवल हरि-गुरु ही हमारे प्राण हैं,तत्क्षण भगवतप्राप्ति हो जायेगी,आगे कुछ करना-धरना नहीं है।
........श्री महाराजजी।
क्रोध बहुत बड़ा दुश्मन है।
----श्री महाराज जी.
क्रोध बहुत बड़ा दुश्मन है।
-श्री महाराज जी.
जो भक्त सिद्धावस्था को प्राप्त कर चुके हैं उन्हें कभी कहीं भी माया स्पर्श नहीं कर सकती। मायापति भक्त के पीछे - पीछे चलता है तब उसकी दासी माया भला भगवान् के प्राणप्रिय भक्तों का क्या बिगाड़ सकती है।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी !!
जो भक्त सिद्धावस्था को प्राप्त कर चुके हैं उन्हें कभी कहीं भी माया स्पर्श नहीं कर सकती। मायापति भक्त के पीछे - पीछे चलता है तब उसकी दासी माया भला भगवान् के प्राणप्रिय भक्तों का क्या बिगाड़ सकती है।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी !!
भक्त उसे कहते हैं जो हर पल हरि-गुरु को याद करता है और हरि-गुरु भी हर पल उसे याद करते हैं।
.........श्री महाराजजी।
भक्त उसे कहते हैं जो हर पल हरि-गुरु को याद करता है और हरि-गुरु भी हर पल उसे याद करते हैं।
.........श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...