This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Wednesday, June 12, 2013
बार
बार सोचो , बार बार सोचो, बस वो मिल जायेंगे. हम इन्द्रियो से तो बहुत
साधना करतें हैं , जबान से राम राम , श्याम श्याम, राधे राधे . तीर्थो में
जाते हैं,मंन्दिरों में जाते है ,पैर से मार्चिंग करते हैं . पूजा करते है
हाथ से, आँख से देखते है मूर्ति को, कान से सुनते है भागवत पूराण , गर्ग
पूराण , गरुड़ पूराण वगैरह ये इन्द्रियों का वर्क है. भगवान कहते हैं ये सब
हम नहीं चाहते. न नोट करते है इसको हम. तुम्हारे मन का अटैचमेंट कितने
परसेंट हुआ भगवान मे बस इसको ही प्यार, भक्ति, साधना कहते है .
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
Avoid
spiritual discussions with an unqualified person. In his present state,
he cannot comprehend those incomprehensible subjects as he is devoid of
spiritual experience. He will only transgress, losing whatever little
faith he has. In addition, his faithlessness will disturb the mind of
the person revealing those divine secrets.
......Jagadguru shri kripalu ji maharaj.
......Jagadguru shri kripalu ji maharaj.
भगवान
तुमकों नहीं भूलते। वो तुम्हारे हृदय में बैठे हैं, सदा सर्वत्र। वो
तुम्हारा साथ नहीं छोड़ते कभी भी। तुम ही भूले हुए हो अपने वास्तविक संबंधी
को। भगवान कहते हैं:- बस मेरा स्मरण करो, और कुछ न करो। मैं सबकुछ करूँगा
तुम्हारा। तुम खाली स्मरण करो, बाकी सब काम मैं करूँगा, और सदा के लिए अपना
बना लूँगा।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
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