Wednesday, June 12, 2013

O my mind! This golden chance is passing away.
Even Brahma, Vishnu and Shankar are under the influence of time, then where do you stand?
Having received this priceless human body which is desired even by the celestial gods, why are you wasting it in worldly pleasures.
Like a deaf and blind person, you neither listen to Saints nor understand the reality of the material world, and remain infatuated in the pleasures of the senses.
“Now I will do, now I will start doing devotion”, saying in this manner, you keep on postponing, for which you will have to repent.
Says Shree ‘Kripalu’, “Within a fraction of a second, annihilation takes place, then on what basis are you overconfident?”
विपरीत वातावरण मिलने पर भी अंत:करण विपरीत वातावरण से प्रभावित न हो, वो साधक है।
-----श्री महाराजजी।
भगवति ने कीनी कृपा जो, ऐसों जायों लाल जी।
राघव चन्दा, यशुदा नन्दा, बनि गये राम कृपाल जी।।

नाम पतित-पावन है प्रभु का, संत जनन यह गाये हैं।
बिनु-कारण करुणाकर सब पर, अपना विरद निभाये हैं।।

श्यामा-श्याम को नाम रटवावें, ऐसों करत कमाल जी।
भक्तन-हित प्रभु नर-तनु धारयो, प्रेम सुधा बरसाने को।।

भक्त-प्रेम वश बने भिखारी, अपना आप लुटाने को।
प्रेम-भाव से जो भी पुकारे, देत प्रेम तत्काल जी।।

सहज स्नेही प्रभु हमारे, बड़े ही भोले-भालें हैं।
चरण-शरण में आकर देखो, प्रभु ऐसे है रखवार जी।।
हम साधकों को सदा यही समझना चाहिए कि हमसे जो अच्छा काम हो रहा है, वह गुरु एवं भगवान की कृपा से ही हो रहा है क्योंकि हम तो अनादिकाल से मायाबद्ध घोर संसारी, घोर निकृष्ट, गंदे आइडियास वाले बिलकुल गंदगी से भरे पड़े हैं। हमसे कोई अच्छा काम हो जाये, भगवान के लिए एक आँसू निकल जाय, महापुरुष के लिए, एक नाम निकल जाये मुख से, अच्छी भावना पैदा हो जाये उसके प्रति हमारी यह सब उनकी ही कृपा से हुआ ऐसा ही मानना चाहिये। अगर वे सिद्धान्त न बताते , हमको अपना प्यार न देते तो हमारी प्रवर्ति ही क्यों होती, कभी यह न सोचो की हमारा कमाल है, अन्यथा अहंकार पैदा होगा , अहंकार आया की दीनता गयी, दीनता गयी तो भक्ति का महल ढह गया। सारे दोष भर जाएंगे एक सेकंड में इसलिए कोई भी भगवत संबंधी कार्य हो जाये तो उसको यही समझना चाहिये कि गुरु कृपा है, उसी से हो रहा है ताकि अहंकार न होने पाये। अगर गुरु हमको न मिला होता, उसने हमको न समझाया होता ,उसने अपना प्यार दुलार न दिया होता, आत्मीयता न दी होती तो हम ईश्वर कि और प्रव्रत्त ही न होतें। अत: उन्ही की कृपा से सब अच्छे कार्य हो रहें है ऐसा सदा मान के चलो।
-----------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
कहते हैं कि मोहब्बत एक बार होती है,
जब-जब उसे देखता हूँ, मुझे हर बार होती है.......
बहुत मुश्किल से होता है तेरी यादों का कारोबार
मुनाफा कम है लेकिन गुज़ारा हो ही जाता है...........
खाली हाथ आये थे, गुरु-भक्ति साथ ले जायेंगे।
------श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...