This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Thursday, June 20, 2013
Monday, June 17, 2013
श्री
महाराजजी के मुखारविंद से: तुम लोगो को मै कितना उठाता हूं पर तुम लोग
नामापराध करके सब बराबर कर देते हो। मै तुम्हारे अपराधों को देखता हूं फिर
भी तुम लोगो से कहने में डर लगता है। सोचता हू, अभी इतने चल रहे हो ,अगर कह
दूँगा तो सत्संग भी छोड़ दोगे। मै माफ करना जानता हूँ,सोचता हू , कभी तो
अक्ल आएगी तो ठीक हो जाओगे।
संसारी
दोष कितने कम हुए, हमे इस पर हर समय दृष्टि रखनी है । हमारे स्वभाव मेँ
अहमता, ममता कितनी कम हुई ,इस और ध्यान देना है । स्वाभिमान कितना कम
हुआ,अपने अपमान का अनुभव होना कितना कम हुआ,आत्म-प्रशंसा कितनी अचछी लगती
है । संसारी विषयों के अभाव मेँ कितना दुख होता है,उनके मिलने मेँ कितना
सुख मिलता है, यह सब अपनी आध्यात्मिक उन्नति को नापने का सबसे बढ़िया पैमाना
है।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
वे
जरा अटपटे स्वभाव के हैं । छिप छिप कर देखते हैं एवं अब तुम जरा सा
असावधान होकर संसारी वस्तु की आसक्ति मे बह जाते हो तब श्याम सुंदर को
वेदना होती है की यह मुझे अपना मान कर भी गलत काम कर रहा है । मन
श्यामसुंदर को दे देने के पश्चात ! उसमे संसारिक चाह न लाना चाहिए । यह
श्यामसुंदर के लिए कष्टप्रद है ।
जीवन क्षणभंगुर है, अपने जीवन का क्षण
क्षण हरि-गुरु के स्मरण में ही व्यतीत करो, अनावश्यक बातें करके समय बरबाद
न करो। कुसंग से बचो, कम से कम लोगो से संबंध रखो, काम जितना जरूरी हो बस
उतना बोलो।
.........श्री महाराजजी।
जीवन क्षणभंगुर है, अपने जीवन का क्षण क्षण हरि-गुरु के स्मरण में ही व्यतीत करो, अनावश्यक बातें करके समय बरबाद न करो। कुसंग से बचो, कम से कम लोगो से संबंध रखो, काम जितना जरूरी हो बस उतना बोलो।
.........श्री महाराजजी।
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