Monday, June 24, 2013

प्रथम नमन गुरुवर पुनि गिरिधर ,
जोइ श्री गुरुवर सोइ श्री गिरिधर।
हरि गुरु कृपा सदा सब ही पर ,
अंतःकरण पात्र पावन कर।
करहु ' कृपालु ' कृपा मोहूँ पर ,
तन मन धन अर्पण चरनन पर।।
The true meaning of the word LOVE (prem) is to give, give, give. Still not be proud or complacent about it. The feeling that I have not given enough yet". The highest ideal of such love was established by Maidens (Gopika) in Holy land of Braj in India for Shri Krishn.
कृष्ण-कृपा बिनु जाय नहिँ , माया अति बलवान |
शरणागत पर हो कृपा , यह गीता को ज्ञान ||२९||

भावार्थ – यह माया शक्ति इतनी बलवती है की शक्तिमान भगवान श्रीकृष्ण की कृपा के बिना नहीं जा सकती | और यह कृपा भी केवल शरणागत जीव पर ही होती है | यह सम्पूर्ण गीता का सारभूत ज्ञान है |

(भक्ति शतक )
जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |
अगर हम ये सदा महसूस करें कि वो अंदर बैठे हैं और नोट करते हैं, एक अपराध नहीं कर सकता कोई,एक बात गलत नहीं सोच सकता कोई।
------प्रभु श्री कृपालुजी महाराज।

Saturday, June 22, 2013

Your thoughts have tremendous power. They can make you a demon or a Saint. It depends on what you reflect upon constantly. As you think, so you will become. If you think good things, you will be good. If you think on evil things, you will be evil. Your rise and fall depends on your thinking. So do not allow your mind to be idle. Do not let it be influenced by the company of wrong people.
......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
Shri Maharaj Ji reminds us.........

If you feel offended at the harsh words of another person, it means that you are not practicing devotion, in a proper manner.
गुरु के व्यवहार को कभी मत देखो। सदा यह सोचो कि वो कुछ भी करें, कैसा भी व्यवहार करें , हमें इससे कोई मतलब नहीं। बस हमें तो आज्ञा पालन करना है। चाहे वो हमसे आँखें फेर लें, चाहे डांट लगायें, लेकिन हमारे प्यार में कभी कमी नहीं आयेगी। सदा उनको सुख पहुंचाना ही हमारे जीवन का प्रथम लक्ष्य है।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...