Friday, July 5, 2013

मानव जीवन का सबसे बड़ा लाभ यही है कि हरि - हरिजन का संग प्राप्त हो जाय। इसके विपरीत भक्त के अपराधी का संग करने से बड़ी और कोई हानि नहीं हो सकती।
...........श्री कृपालु महाप्रभु जी।
कोई महापुरुष हो , चाहे राक्षस हो। अपने मन में दूसरे के प्रति हमेशा अच्छी भावना होनी चाहिये। जिससे अच्छे विचार अंतःकरण में आवें। वो जो है, वो तो रहेगा ही। वो राक्षस होगा, तो राक्षस रहेगा। महापुरुष होगा तो महापुरुष रहेगा। हम अपने अंदर अगर दुर्भावना लाते हैं तो हमने तो अपना अंतःकरण बिगाड़ लिया। अब भगवान् जो थोड़ा पैर रखे आने के लिए एबाउट टर्न चल दिये। वो कहते हैं - क्योंकि तुम तो औरों को बुलाते हो , इसलिये मैं नहीं रहता ऐसे घर में।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
Due to the extensive destruction in Kedarnath and many surrounding towns in Uttarakhand from flash floods caused by torrential rains,
JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ has donated 1 Crore rupees to the CM's Relief Fund.
"O Shri Krishna! You have uncountable divine associates, but You alone are my only refuge. I have suffered all kinds of pain in this world. Please listen to my cries."
.........SHRI MAHARAJ JI.
The individual soul, who is a part of God, is forgetful of Him due to the eternal power maya.
-----SHRI MAHARAJ JI.
जो नींद में सो रहा हो उसे जगाया जा सकता है। किन्तु जो सोने का बहाना कर रहा हो , ईश्वर से विमुख होकर विषय भोग में लिप्त रहने में ही अपना भला समझे , उसे कौन समझा सकता है।
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
सत्संग हो या कुसंग , मनुष्य जैसा संग करता है वैसा बन जाता है।
...........श्री महाराज जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...